सक्ती (गंगा प्रकाश)। सिर्फ़ “पर्यावरण विभाग के बस की बात है” कहकर कोई भी अधिकारी अपने जिम्मे से नहीं बच सकता।स्टोन क्रशर पर कार्रवाई किनकी ज़िम्मेदारीस्टोन क्रशर को चलाने के लिए खनिज/खनन विभाग से लीज़ या लाइसेंस, और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) से “कंसेंट टू ऑपरेट” व पर्यावरण से जुड़ी मंज़ूरियाँ ज़रूरी होती हैं।धूल-दूषित हवा, पानी छिड़काव न होना, ढंककर परिवहन न करना, रिहायशी क्षेत्र के बहुत पास क्रशर चलाना आदि सीधे-सीधे प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन हैं, जिन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन दोनों कार्रवाई कर सकते हैं।खनिज अधिकारी अवैध खनन, लीज की शर्तों के उल्लंघन, ज़मीन की सीमाओं से बाहर खुदाई जैसी बातों पर कार्रवाई कर सकते हैं।स्थानधूल से होने वाली दिक्कत (खांसी, दम, खेतों पर मिट्टी की परत, घरों में धूल आदि)पर्यावरणीय नियमो , जैसे पानी का छिड़काव न होना, ढंककर ट्रकों से परिवहन न होना, हरियाली न होना आदि।
खनिज अधिकारी की मुख्य जिम्मेदारियां यह देखना कि क्रशर के पास वैध लीज / लाइसेंस और अन्य स्वीकृतियां हों, अवैध खनन या बिना अनुमति संचालन न हो।खदान/क्रशर में सुरक्षा मानकों, दूरी, फेंसिंग, गड्ढों को सुरक्षित करने आदि संबंधी सरकारी गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं, इसका निरीक्षण करना।राजस्व हानि (रॉयल्टी चोरी, अवैध भंडारण, बिना रजिस्टर रेत-पत्थर बिक्री) को रोकना और रिकॉर्ड की जांच करना।खनिज अधिकारी कौन-कौन सी कार्रवाई कर सकते हैंबिना अनुमति या नियमों का उल्लंघन करते हुए चल रहे स्टोन क्रशर/खदान पर:नोटिस जारी करना और जवाब मांगना।अवैध खनन, अवैध भंडारण या परिवहन पर जुर्माना/पेनल्टी लगाना (कई मामलों में लाखों का जुर्माना लगाया गया है)।ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर मशीनरी व वाहन जब्त कराना और एफआईआर/कानूनी कार्रवाई कराना, खासकर अवैध खनन के मामलों में।गंभीर उल्लंघन या बार-बार नियम तोड़ने पर क्रशर को सील कर संचालन रुकवाने की सिफारिश/कार्रवाई कर सकते हैं (कई जिलों में संयुक्त टीम ने क्रशर सील किए हैं)।



