CG: गरियाबंद में स्कूल सफाई कर्मचारियों का फूटा दर्द, 14 साल की सेवा के बाद भी 3400 रुपये मानदेय, रायपुर में मुख्यमंत्री निवास घेराव की तैयारी

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद में स्कूल सफाई कर्मचारियों का फूटा दर्द, – “हमारे बच्चे पढ़ें भी, खाना भी खाएं और परिवार भी चले, लेकिन 3400 रुपये में आखिर क्या-क्या करें?” – यह सवाल गरियाबंद विकासखंड के अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारियों की आंखों में तैर रहा था जब वे सोमवार को शनि देव मंदिर प्रांगण में ब्लॉक स्तरीय बैठक में जुटे। 14 साल से अधिक समय से स्कूलों की सफाई व्यवस्था संभाल रहे इन कर्मचारियों को अभी भी नियमितीकरण का लाभ नहीं मिला। ऊपर से अप्रैल माह का मानदेय भी अटका पड़ा है।

बैठक में अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के ब्लॉक पदाधिकारी, कोषाध्यक्ष, सचिव और विभिन्न स्कूलों से आए कर्मचारी सदस्य मौजूद थे। चर्चा का मुख्य मुद्दा था – अप्रैल माह का बकाया मानदेय, जिसे अब तक शासन से जारी नहीं किया गया। कर्मचारियों का कहना था कि स्कूल खुलने के बाद भी उनके भुगतान की व्यवस्था नहीं की गई, जबकि ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी कई कर्मचारियों को काम पर बुलाया जाता रहा।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 16 जुलाई को रायपुर में प्रदेश स्तरीय रैली और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर मानदेय भुगतान, नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान लागू करने की मांग की जाएगी। आंदोलन को सफल बनाने के लिए निर्णय लिया गया कि ब्लॉक के प्रत्येक संकुल से कम से कम एक-एक वाहन रायपुर के लिए रवाना होगा।

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‘14 साल से झाड़ू थामे हैं, लेकिन हमारा भविष्य अब भी अधर में’

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व जिला सचिव हरिशंकर यादव ने कहा, – “हम लोग पिछले 14 वर्षों से लगातार स्कूलों की सफाई कर रहे हैं। कोरोना जैसे मुश्किल समय में भी बिना छुट्टी के काम किया। फिर भी हमें सिर्फ 3400 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है। इससे घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई, राशन, बिजली बिल, इलाज – कुछ भी संभव नहीं है। सरकार हर वर्ग के लिए घोषणा करती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं।”

संगठन ने दिखाई एकता, गरियाबंद से रायपुर तक आंदोलन का बिगुल

बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष युगल किशोर साहू ने कहा कि यह लड़ाई अब आर-पार की होगी। यदि जल्द मानदेय भुगतान और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी स्कूलों की रीढ़ हैं। बिना उनके स्कूल परिसर की स्वच्छता, बच्चों का स्वास्थ्य और सरकार की स्वच्छता रैंकिंग संभव नहीं, लेकिन इनके हितों की लगातार अनदेखी हो रही है।

बैठक में इन पदाधिकारियों की रही प्रमुख उपस्थिति

बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष युगल किशोर साहू, ब्लॉक सचिव कुलेश्वर यादव, कोषाध्यक्ष हेमराज ध्रुव, उपाध्यक्ष सुरेश चक्रधारी के साथ उत्तम मरकाम, संतोष सोनवानी, ओंकार यादव, धर्मेंद्र ध्रुव, हुमन लाल, मोहर सिंह, गुरेश दीवान, मोहनी साहू, टिकेश्वरी, कला बाई ध्रुव, जितेश नंदाल, भुनेश्वरी यादव और हेमिन सोरी उपस्थित रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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‘हमारे लिए कोई महंगाई भत्ता नहीं, कोई सुरक्षा नहीं’

बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें किसी भी प्रकार का महंगाई भत्ता नहीं मिलता। स्कूल की सफाई के दौरान उन्हें साफ-सफाई सामग्री खुद खरीदनी पड़ती है, क्योंकि कई स्कूलों में बजट नहीं दिया जाता। उल्टे यदि कोई शिक्षक या प्रधानपाठक सफाई व्यवस्था में कमी पाते हैं, तो कर्मचारियों को फटकार सुननी पड़ती है। कर्मचारियों का कहना था, – “हमारे लिए ना पीएफ है, ना पेंशन। यदि कोई कर्मचारी बीमार पड़ जाए तो उसकी जगह दूसरा रख लिया जाता है, लेकिन पुरानी सेवाओं का कोई मोल नहीं। सरकार की योजनाओं में हमारा नाम भी नहीं आता।”

आंदोलन से गरियाबंद ब्लॉक प्रशासन की बढ़ी चिंता

स्कूल सफाई कर्मचारियों के इस निर्णय के बाद गरियाबंद ब्लॉक शिक्षा विभाग और पंचायत विभाग में हलचल मच गई है। सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से रायपुर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक भुगतान आदेश जारी नहीं हो सका। कर्मचारियों का मानना है कि जब तक मुख्यमंत्री स्तर पर सुनवाई नहीं होती, तब तक उनकी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

क्या कहते हैं कर्मचारी

बैठक के बाद कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा –  “हमें भी इंसान समझा जाए। 3400 रुपये में घर नहीं चलता। रोज महंगाई बढ़ रही है, स्कूलों में पानी, झाड़ू, वाशरूम सबकी सफाई का दबाव रहता है। अगर हमारा आंदोलन नहीं सुना गया, तो स्कूलों में ताले डालकर सड़क पर उतरेंगे।”


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