हमारी बेटी जिज्ञासा, जिसे हम प्यार से जिया कहते थे, अब हमारे बीच नहीं है। पाँच महीने और पंद्रह दिन हो चुके हैं, लेकिन हर पल उसकी यादें हमारे दिल को चीरती हैं। जिया हमारे घर की सबसे प्यारी, सबसे मासूम, और सबसे जीवन से भरी हुई बच्ची थी। उसके बिना हर दिन अधूरा सा लगता है, हर खुशी में एक खालीपन है। माता-पिता और भाई के लिए उसका खो जाना केवल एक अपूरणीय दुख नहीं, बल्कि हमारी पूरी दुनिया का खाली हो जाना जैसा है।
जिया का जाना हमारे लिए किसी भी शब्द में बयान करना असंभव है। उसकी मासूम हँसी, उसकी छोटी-छोटी बातों में छुपी जिज्ञासा, उसकी हर खुशी में शामिल होने की उत्सुकता — सब अब केवल यादों में सीमित रह गई है। हर सुबह उठते ही हमें उसकी कमी महसूस होती है। नया साल आए, नया दिन आए, लेकिन उनके महत्व का कोई अर्थ नहीं रह गया। समाज और पड़ोसी हमें सांत्वना देने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका शब्द केवल हमारे खालीपन को और गहरा कर देता है।
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी अब बहुत मुश्किल हो गई है। माता पूरे दिन जिया की याद में हर पल जी रही हैं। हर छोटी-छोटी चीज़ उन्हें जिया की याद दिलाती है। वह सोचती हैं कि आज जिया अपने सहेलियों के साथ नव वर्ष की बधाई दे रही होती, पिकनिक पार्टी में भाग ले रही होती, पूजा-पाठ और त्योहारों का आनंद ले रही होती। जिया के ना रहने से पूरा घर सुना हो गया है। हर खुशी का मौका, हर उत्सव, अब हमें केवल जिया की याद दिलाता है, और वह अधूरी लगती है।
जिया का भाई भी अब हर पल उसकी कमी महसूस करता है। वह अपनी बहन की याद में खो जाता है, उसके बिना खेलने, हँसने और खुशी मनाने के सारे लम्हे अब फीके और बेरंग लगते हैं। पिता के रूप में मैं यह देखता हूँ कि हमारी बेटी का जाना केवल व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि हमारे पूरे परिवार की दुनिया बदल गई है। उसका हर कदम, हर मुस्कान हमारे जीवन को रोशनी देती थी। अब वह रोशनी चली गई है, और केवल उसके यादों की आभा हमारे साथ बची है।
जिया के बिना जीवन का हर पल कठिन है। माता-पिता और भाई के लिए हर दिन एक चुनौती बन गया है। हम हर त्योहार, हर छोटी खुशी, हर साधारण पल में उसकी कमी महसूस करते हैं। पड़ोसी और समाज केवल शब्दों में हमारी सांत्वना दे सकते हैं, लेकिन हमारे दिल में जो खालीपन है, उसे केवल परिवार ही समझ सकता है।
हमारा परिवार अब भी जिया की यादों में जी रहा है। उसके बिना जीवन का हर पल कठिन है, पर हम उसकी यादों को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि उसकी मासूमियत और उसकी जिज्ञासा हमेशा हमारे साथ बनी रहें। वह हमारे जीवन का हिस्सा हमेशा रहेगी, चाहे वह हमारे सामने न हो।
हम यह लेख इसलिए लिख रहे हैं कि शायद कोई माता-पिता हमारी पीड़ा को समझ सकें। जो दर्द हम झेल रहे हैं, वह शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। परंतु हम अपनी बेटी जिया को याद करते हुए उसका सम्मान करना चाहते हैं। उसकी मासूमियत, उसकी जिज्ञासा और उसका प्यार हमेशा हमारे जीवन में एक अमिट छाप छोड़ गई है।
जिया, हमारे दिल के टुकड़े, हमारे परिवार की सबसे अनमोल रचना, हमेशा हमारे साथ रहेगी। हम उसे हमेशा याद करेंगे, उसके बिना हर दिन मुश्किल है, लेकिन उसकी यादें ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
— पिता की ओर से
