लापरवाही की कीमत जनता चुका रही, सड़क बनी दलदल, हादसों का खतरा बढ़ा; सात दिन में सुधार नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार जल संरक्षण, हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने तथा जल की एक-एक बूंद बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत फिंगेश्वर की लापरवाही के चलते नल-जल योजना का पानी पिछले करीब दो माह से सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। नगर के पुराना बस स्टैंड स्थित मुख्य मार्ग पर नल-जल योजना की मुख्य पाइप लाइन लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है। पाइप लाइन की मरम्मत नहीं होने के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर स्वच्छ पेयजल सड़क पर बह रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस नगर में कई वार्डों के लोग पर्याप्त पेयजल नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बहुमूल्य पानी खुलेआम नालियों और सड़कों में बहकर व्यर्थ हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइप लाइन में कई स्थानों पर बड़े-बड़े लीकेज हो चुके हैं। पानी का दबाव इतना अधिक है कि पानी दो से तीन फीट तक फव्वारे की तरह ऊपर उछलता दिखाई देता है। दिन-रात लगातार बहते पानी से मुख्य सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गई है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों को यह भी समझ नहीं आता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। कीचड़ और जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालक रोजाना फिसल रहे हैं, जबकि स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और व्यापारी जान जोखिम में डालकर इसी मार्ग से आवागमन करने को मजबूर हैं।
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नगर के नागरिकों का आरोप है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले लगभग दो माह से पाइप लाइन फूटी हुई है और इस दौरान नगर पंचायत को कई बार लिखित आवेदन, मौखिक शिकायत तथा मोबाइल फोन के माध्यम से इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी केवल आश्वासन देते रहे, लेकिन आज तक पाइप लाइन की मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पाइप लाइन की मरम्मत कर दी जाती तो लाखों लीटर पानी की बर्बादी रोकी जा सकती थी और सड़क भी इस हालत में नहीं पहुंचती।
सड़क पर जलभराव से व्यापार भी प्रभावित
मुख्य मार्ग पर लगातार पानी जमा रहने से आसपास स्थित दुकानों के सामने गंदगी और कीचड़ फैल गया है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक दुकानों तक आने से बच रहे हैं, जिससे व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। कई व्यापारियों ने बताया कि पहले की तुलना में ग्राहकी लगभग आधी रह गई है। दिनभर सड़क पर पानी और कीचड़ रहने के कारण बाजार की रौनक भी प्रभावित हो रही है।
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बीमारियों का भी बढ़ा खतरा
स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि लगातार जलभराव बने रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, लेकिन यहां स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
करोड़ों की योजना पर उठने लगे सवाल
नल-जल योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर तक स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन नगर पंचायत की लापरवाही से योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर पाइप लाइन तो बिछा दी गई, लेकिन उसके रखरखाव की कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। यदि छोटी-छोटी खराबियों को समय पर ठीक नहीं किया जाएगा तो पूरी योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
सात दिन का अल्टीमेटम, नहीं सुधरी व्यवस्था तो होगा घेराव
लगातार उपेक्षा से नाराज वार्डवासियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन को सात दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर फूटी पाइप लाइन की मरम्मत कर लीकेज बंद नहीं किया गया और सड़क की स्थिति नहीं सुधारी गई तो नगर पंचायत कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जनता का सवाल
जब पानी बचाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो आखिर नगर पंचायत की लापरवाही से रोजाना बह रहे हजारों लीटर पेयजल का जिम्मेदार कौन?
