गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय में प्राचार्य की बहाली को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार को उस समय उग्र रूप ले बैठा जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल परिसर से निकलकर सड़क पर उतर आए और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए। छात्रों ने “प्राचार्य हटाओ, स्कूल बचाओ” जैसे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। छात्रों के तीव्र विरोध को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्य की बहाली का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया, जिसके बाद फिलहाल विवाद शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सोमवार सुबह स्कूल खुलते ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्र हुए और प्राचार्य की पुनः पदस्थापना का विरोध जताया। विद्यार्थियों का कहना था कि पूर्व में निलंबित प्राचार्य की पुनः नियुक्ति से स्कूल का वातावरण प्रभावित होगा और पढ़ाई का माहौल खराब हो सकता है। इसी नाराजगी के चलते छात्रों ने सामूहिक रूप से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया।
हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर छात्र-छात्राएं स्कूल से निकलकर शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान कई जगह यातायात भी प्रभावित हुआ, हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ने दिया।

मार्च के दौरान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। छात्रों का कहना था कि उनकी पढ़ाई और स्कूल के भविष्य से जुड़ा मामला है, इसलिए उनकी बात सुनी जानी चाहिए। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर पंकज डेहरे से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित आवेदन सौंपा।
अपर कलेक्टर ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और शिक्षा विभाग को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। प्रशासनिक आश्वासन के बाद छात्रों को वापस स्कूल भेज दिया गया। इसी बीच जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में प्राचार्य श्रीमती वंदना पाण्डेय की बहाली को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 4 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें निलंबन से बहाल कर अस्थायी रूप से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय गरियाबंद में पदस्थ किया गया था। छात्रों के विरोध के बाद यह आदेश रद्द कर दिया गया।
छात्रों का कहना है कि वे केवल विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण चाहते हैं और उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि स्कूल के हित में है। वहीं प्रशासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किए बिना विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य होती दिखाई दे रही है, हालांकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जारी है कि आखिर ऐसी स्थिति उत्पन्न क्यों हुई। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
फिलहाल छात्रों के विरोध के बाद बहाली आदेश निरस्त होने से विवाद पर अस्थायी विराम लग गया है और विद्यालय में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां पुनः शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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