एक पुलिया पर सिर्फ ऊपर से लीपापोती, दूसरी पर 99,850 रु.खर्च का दावा लेकिन मौके पर मरम्मत के निशान तक नहीं; ग्रामीण बोले– कागजों में विकास, जमीन पर बदहाली

देवभोग/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। देवभोग विकासखंड की ग्राम पंचायत कोसमकानी में विकास कार्यों की हकीकत सवालों के घेरे में है। ऊपरपीटा–केन्दूवन मार्ग पर स्थित दो पुलियों की मरम्मत के नाम पर कुल ₹1 लाख 99 हजार 700 की राशि खर्च किए जाने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में मरम्मत पूरी दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर पुलियों की हालत आज भी बदहाल बनी हुई है।

मीडिया टीम द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान पहली पुलिया पर केवल ऊपर की फ्लोरिंग दिखाई दी, जबकि नीचे का ढांचा, स्तंभ और दोनों ओर की दीवारें क्षतिग्रस्त मिलीं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मरम्मत नहीं, बल्कि केवल दिखावे का काम है। पुलिया की वास्तविक स्थिति आज भी जोखिमपूर्ण बनी हुई है और भारी वाहन गुजरने पर हादसे की आशंका बनी रहती है।

दूसरी पुलिया का मामला और भी गंभीर बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस पुलिया पर भी 99,850 रु खर्च दिखाया गया है, लेकिन मौके पर किसी प्रकार की नई मरम्मत या निर्माण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। पुलिया पहले की तरह जर्जर है और आम लोगों के लिए खतरा बनी हुई है।
ग्रामीणों ने उठाए तीखे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोनों पुलियों की मरम्मत पर सरकारी राशि खर्च हुई है, तो उसका असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता? यदि काम पूरा हुआ है तो पुलियां बदहाल क्यों हैं? और यदि काम नहीं हुआ, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
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स्थानीय निवासी घनश्याम बीसी ने कहा कि वे प्रतिदिन इसी मार्ग से गुजरते हैं। पुलिया की हालत देखकर हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। उनका कहना है कि कागजों में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन मौके पर मजबूत मरम्मत नजर नहीं आती। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।


पुराने निर्माण भी सवालों के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच पूर्व कार्यकाल में भी पद पर थे। उसी दौरान इस मार्ग पर बने कई पुल-पुलियों में से अधिकांश दो-तीन वर्षों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गए थे। अब वर्तमान कार्यकाल में भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
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जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत और जनपद पंचायत से दोनों पुलियों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड तथा भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या गुणवत्ताहीन निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, सचिव और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।




