कबाड़ से जुगाड़ के जरिए बच्चों में जगाई विज्ञान की जिज्ञासा, राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन ने बढ़ाया क्षेत्र का गौरव
छुरा (गंगा प्रकाश)। गांव के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक ने अपने नवाचार और अलग सोच के जरिए ऐसी पहचान बनाई कि उनकी प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोग और नवाचार से जोड़ने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरदी, संकुल केंद्र छुरा-ब के शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी को अब विधायक रोहित साहू ने सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की है। विश्वकर्मा जयंती एवं लोकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम तितईदादर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी को सम्मानित किया गया।
शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से बनाई है। सीमित संसाधनों के बीच अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी शैक्षणिक मॉडल में बदलकर विद्यार्थियों को विज्ञान के जटिल विषयों को सरल और रोचक तरीके से समझाने का उनका प्रयास लगातार चर्चा में रहा है। उनके नवाचारों ने न केवल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद की, बल्कि विज्ञान प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहचान भी मिली।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के बाद अब राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार की ओर
सुदामा प्रसाद लोधी की उपलब्धियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। उनके शैक्षणिक कार्यों, नवाचार और विद्यार्थियों के बीच किए जा रहे प्रयोगात्मक प्रयासों को देखते हुए उनका शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार हेतु चयन किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के एक शासकीय विद्यालय में पदस्थ शिक्षक का इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयन होना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
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उनके चयन से विद्यालय परिवार, संकुल क्षेत्र, विकासखंड छुरा और गरियाबंद जिले के शिक्षा जगत में उत्साह का माहौल है। वहीं राजिम विधानसभा क्षेत्र के लिए भी इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षक की उपलब्धि यह संदेश देती है कि बेहतर संसाधनों के अभाव के बावजूद यदि शिक्षक अपनी सोच, मेहनत और नवाचार को शिक्षा से जोड़ें तो ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
विधायक रोहित साहू ने की सराहना
सम्मान समारोह में विधायक रोहित साहू ने शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार करने वाले शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने शिक्षक लोधी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे आगे भी इसी तरह नवाचार करते रहें और राष्ट्रीय स्तर पर जिले एवं छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें।
विधायक द्वारा शिक्षक का सम्मान किए जाने से कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की। ग्रामीण अंचल के शिक्षक की उपलब्धि को क्षेत्र के लिए गौरव बताते हुए उपस्थित लोगों ने उनके प्रयासों की सराहना की।
गांव के स्कूल से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर
शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी का कार्य केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रयोग करने, सवाल पूछने और आसपास उपलब्ध संसाधनों से नई चीजें तैयार करने के लिए प्रेरित किया। ‘कबाड़ से जुगाड़’ के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि हमारे आसपास मौजूद वस्तुओं और दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान में भी विज्ञान की भूमिका है।
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इसी सोच और नवाचारी शिक्षण पद्धति के चलते उनके कार्यों को विज्ञान प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। अब राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन ने उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।
समारोह में जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीण रहे मौजूद
सम्मान समारोह में जिला पंचायत सदस्य शिवांगी चतुर्वेदी, जनपद पंचायत छुरा अध्यक्ष मीरा ठाकुर, नगर पंचायत छुरा अध्यक्ष एवं प्रथम नागरिक लुकेश्वरी थानसिंग निषाद, ग्राम पंचायत खरखरा के सरपंच, विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन राधे लाल साहू ने किया। समारोह में शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी को सम्मानित किए जाने पर उपस्थित लोगों ने उन्हें बधाई दी और राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
एक शिक्षक की उपलब्धि बनी पूरे क्षेत्र की पहचान
शिक्षक सुदामा प्रसाद लोधी का सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में नवाचार आधारित शिक्षा को मिलने वाली पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है। जिस सरकारी विद्यालय में संसाधन सीमित हो सकते हैं, वहीं से एक शिक्षक ने अपनी रचनात्मक सोच के जरिए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अब राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन इस उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बना देता है। आने वाले समय में उनके नवाचार और शिक्षण कार्य से क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
