Cgbrekings news: सक्ती जिले में शिक्षा विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा: फेल छात्र की मार्कशीट से बना प्रधान पाठक, RTI से खुला सबसे बड़ा घोटाला

 

राजू सिदार नामक शिक्षक 2005 से नौकरी पर; फर्जी दस्तावेज़ के सहारे वर्षों से उठा रहा सरकारी वेतन, अब मामला IPC 420 के तहत जांच के घेरे में

 

सक्ती/मालखरौदा(गंगा प्रकाश)। शिक्षा विभाग के तहत एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां डिक्सी गांव में पदस्थ प्रधान पाठक राजू सिदार पिछले लगभग दो दशकों से फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी कर रहा है। यह सनसनीखेज खुलासा हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2005 में राजू सिदार ने एक फेल छात्र के रोल नंबर का इस्तेमाल करते हुए नकली मार्कशीट तैयार करवाई, जिसमें उत्तीर्ण अंक दर्शाए गए थे। उसी जाली दस्तावेज के सहारे उसने शिक्षक पद के लिए आवेदन दिया और सरकारी नियुक्ति प्राप्त कर ली।

RTI से सामने आया कि जिस छात्र का रोल नंबर इस्तेमाल किया गया, उसकी मूल अंकसूची में “अनुत्तीर्ण” दर्ज था, जबकि राजू सिदार की जमा की गई फर्जी अंकसूची में उसी रोल नंबर के तहत उसे उत्तीर्ण दिखाया गया है।

शिक्षा विभाग की लापरवाही या मिलीभगत?

  • सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने वर्षों तक राजू सिदार की फर्जी शैक्षणिक योग्यता की किसी ने जांच क्यों नहीं की?
  • क्या नियुक्ति के समय दस्तावेजों की सही ढंग से सत्यापन नहीं हुआ या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला चलता रहा?

 

यदि यह घोटाला RTI के जरिए सामने नहीं आता, तो शायद यह धोखाधड़ी आने वाले वर्षों तक जारी रहती।

IPC की धारा 420 के तहत मामला दर्ज होने की संभावना

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 468 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) के तहत पूरी तरह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

इसके लिए न सिर्फ आरोपी शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है, बल्कि उस पर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है।

जनता का सवाल: जांच केवल शिक्षक तक सीमित रहेगी या पूरा नेटवर्क उजागर होगा?

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा विभाग को इस मामले में केवल राजू सिदार तक सीमित न रहकर संपूर्ण दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली की जांच करनी चाहिए।

ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि कई अन्य नियुक्तियां भी फर्जी दस्तावेजों पर की गई हो सकती हैं।


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