सारंगढ़: बिजली के लो वोल्टेज से ग्रामीण बेहाल, क्रशर संचालक हाई वोल्टेज पर मस्त!

 

सारंगढ़/रायगढ़ (गंगा प्रकाश)। बिजली के लो वोल्टेज से ग्रामीण बेहाल : “जब पंखा भी न चले, बल्ब टिमटिमाए और फ्रिज हो जाए बंद, तो समझिए विकास सिर्फ कागजों में है!”

ये वाक्य सारंगढ़ के गुड़ेली गांव के सेन्दुरस मोहल्ले के ग्रामीणों के मुंह से निकलते हैं, जो आज बिजली के लो वोल्टेज की गंभीर समस्या से दम तोड़ती उम्मीदों के साथ जूझ रहे हैं।

गांव में बिजली है, मगर नाम मात्र की। इतनी धीमी कि बल्ब भी उजाला देने में असमर्थ हैं और पंखे सिर्फ हवा की याद दिलाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या गांव के लोग बिजली की बुनियादी सुविधा के अधिकारी नहीं हैं?

गर्मी में जलते लोग, लेकिन बिजली विभाग की चुप्पी

चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में जहां पंखा, कूलर, और फ्रिज इंसान की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं, वहीं गुड़ेली के ग्रामीण अक्सर अंधेरे और गर्मी की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। घरों में बिजली तो आती है, लेकिन वोल्टेज इतना कम होता है कि मोबाइल चार्जर तक काम नहीं करता। कई बार बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की तबीयत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

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ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी न सुनते हैं, न ही कोई कार्रवाई करते हैं। महीनों से चली आ रही इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला है।

क्रशरों को मिल रही फुल वोल्टेज की VIP सेवा?

अब सबसे बड़ा सवाल उठता है—जब ग्रामीणों को बिजली नहीं मिल रही, तो फिर यह बिजली जा कहां रही है?

इसका जवाब मिलता है पास ही में चल रहे दर्जनों क्रशर प्लांटों में, जो दिन-रात धड़ल्ले से काम कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इन क्रशरों को विद्युत विभाग ने कम क्षमता वाले मशीनों के लिए अनुमति दी है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि अधिक क्षमता वाले भारी मशीनें वहां लगाई गई हैं, जो बिना रुके बिजली की सप्लाई चूस रही हैं।

क्या विद्युत विभाग भी इस मिलीभगत में शामिल है?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्युत विभाग की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं।

कैसे संभव है कि ग्रामीणों को वोल्टेज नहीं मिल रहा और पास के क्रशर 24 घंटे बिना रुकावट चल रहे हैं?

क्या यह खुला भ्रष्टाचार नहीं है? क्या बिजली विभाग औद्योगिक लोभियों के आगे गांव की जनता के हितों को कुर्बान कर रहा है?

विद्युत विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है

गांव के युवाओं, किसानों और महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही लो वोल्टेज की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों की मांग है:

क्रशरों की बिजली खपत की स्वतंत्र जांच कराई जाए।*जिन क्रशर संचालकों ने परमिशन से अधिक विद्युत खपत की है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।*सेन्दुरस मोहल्ले के लिए नया उच्च क्षमता वाला ट्रांसफॉर्मर लगाया जाए।*बिजली विभाग की भूमिका की विधायक/जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई जाए।

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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मसले पर न तो बिजली विभाग का कोई आधिकारिक बयान सामने आया है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने संज्ञान लिया है।

यह स्थिति दर्शाती है कि ग्रामीण समस्याएं उनकी प्राथमिकता में कहीं नहीं हैं।

जबकि सरकारी योजनाओं में ‘हर घर बिजली’ का दावा किया जा रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत ये है कि बिजली सिर्फ अमीरों के लिए है और गरीबों के हिस्से में अंधेरा है।

सारंगढ़ के गुड़ेली गांव की यह स्थिति सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता की कहानी है। जहां जनता को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित कर, पूंजीपतियों और औद्योगिक इकाइयों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस गम्भीर मुद्दे पर कोई संज्ञान लेगा, या फिर गांव की जनता को अंधेरे और भ्रष्टाचार के बीच अपनी ज़िंदगी यूं ही गुजारनी पड़ेगी?


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