नजदीकी ठेकेदारों को काम मिलने की चर्चा, कई पंचायतों में विकास कार्य ठप – सरपंचों की भूमिका भी सीमित
छुरा/राजिम (गंगा प्रकाश)। राजिम विधानसभा क्षेत्र में लगातार हो रहे भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रमों के बीच अब विकास कार्यों की पारदर्शिता और समान वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के कई ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि विधायक रोहित साहू के कार्यकाल में विकास कार्यों की आड़ में ठेकेदारी व्यवस्था हावी होती जा रही है और अधिकांश निर्माण कार्य विधायक के नजदीकी लोगों या संबंधियों से जुड़े ठेकेदारों के माध्यम से कराए जा रहे हैं।
क्षेत्र में हाल ही में ग्राम जुनवानी में सीसी रोड, कनेसर में रंगमंच, खोपलीपठ धाम में सामुदायिक भवन तथा ग्राम पाटसिवनी में सीसी रोड, टीन शेड और देवगुड़ी भवन जैसे कई विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया है। इन कार्यक्रमों को विकास की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई पंचायतों में स्थिति अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर कुछ चुनिंदा पंचायतों को ही प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य पंचायतों की अनदेखी की जा रही है।
पंचायतों में सरपंच की भूमिका हो रही कमजोर
सबसे बड़ा सवाल पंचायत स्तर पर सरपंचों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। कई पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके गांवों में होने वाले निर्माण कार्यों की जानकारी तक उन्हें समय पर नहीं मिलती और कार्य सीधे ठेकेदारों के माध्यम से कराए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर के विकास कार्यों में स्थानीय सरपंच और पंचायत की भूमिका लगभग समाप्त होती दिखाई दे रही है। जहां पंचायत को विकास कार्यों की योजना और निगरानी की जिम्मेदारी होनी चाहिए, वहां ठेकेदार सीधे काम करते नजर आ रहे हैं। इससे पंचायत राज व्यवस्था की भावना कमजोर होती दिखाई दे रही है।
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नजदीकी संबंधियों को ठेका मिलने की चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि विधायक के नजदीकी संबंधियों और समर्थकों को ही अधिकांश निर्माण कार्यों का ठेका मिल रहा है। आरोप है कि सीसी रोड, टीन शेड, रंगमंच, सामुदायिक भवन और अन्य छोटे-बड़े कार्यों में एक ही समूह के ठेकेदार बार-बार दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ठेकेदारी में पक्षपात की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। लोगों का आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता नजर नहीं आती और योग्य स्थानीय ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पा रहा है।
कई पंचायतों में विकास कार्यों का अभाव
क्षेत्र के कई ग्राम पंचायत ऐसे बताए जा रहे हैं जहां लंबे समय से कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन पंचायतों के सरपंच और सचिव विधायक या उनके प्रतिनिधियों से जुड़े नहीं हैं, वहां विकास कार्यों की स्वीकृति तक नहीं मिल पा रही है।
कई पंचायतों में तो स्थिति यह बताई जा रही है कि क्षेत्रीय दौरा कार्यक्रम तक नहीं होते, जिससे ग्रामीणों की समस्याएं सीधे जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विधायक का दौरा ही नहीं होगा तो पंचायतों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
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ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का लाभ पूरे विधानसभा क्षेत्र को समान रूप से मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में कुछ क्षेत्रों को लगातार प्राथमिकता मिलती दिखाई दे रही है जबकि अन्य पंचायतें उपेक्षित महसूस कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का प्रचार तो जोर-शोर से किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में कई गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों की घोषणा और भूमिपूजन कार्यक्रम ज्यादा हो रहे हैं, जबकि वास्तविक काम कम दिखाई दे रहा है।
जांच की उठ रही मांग
क्षेत्र के कई लोगों ने पंचायत स्तर पर हुए विकास कार्यों और ठेकेदारी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्य पारदर्शी और नियमों के अनुसार हुए हैं तो जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा।
हालांकि इस पूरे मामले में विधायक रोहित साहू या उनके प्रतिनिधियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विकास कार्यों में पारदर्शिता और समानता नहीं लाई गई तो आने वाले समय में यह मुद्दा क्षेत्र की बड़ी राजनीतिक बहस बन सकता है।
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