छुरा (गंगा प्रकाश)। वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए अमेठी सर्कल अंतर्गत ग्राम दादरगांव (पुराना) में 21.118 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जा मुक्त कराया है। दो दिनों तक चले इस अभियान में 17 अतिक्रमणकारियों को बेदखल किया गया तथा कब्जे वाली भूमि का समतलीकरण कर उसे पुनः वन विभाग के अधीन ले लिया गया। वन विभाग की इस कार्रवाई को क्षेत्र में वन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त के निर्देश एवं वन मंडलाधिकारी गरियाबंद के मार्गदर्शन में दिनांक 3 एवं 4 जून 2026 को विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान संचालित किया गया। अभियान का नेतृत्व उप वन मंडलाधिकारी राजिम विकास चंद्राकर एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी छुरा लवकुश पांडे ने किया। उनके नेतृत्व में गठित वन अमला ग्राम दादरगांव (पुराना) पहुंचा, जहां लंबे समय से वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।

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कार्रवाई के दौरान ग्राम के सरपंच, उपसरपंच, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में वन भूमि का सत्यापन किया गया। सीमांकन एवं अभिलेखों के परीक्षण के बाद वन विभाग ने 17 अतिक्रमणकारियों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। पूरे अभियान के दौरान वन विभाग का अमला सतर्क रहा और नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

वन विभाग के अनुसार कुल 21.118 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। कार्रवाई के दौरान कब्जे वाली भूमि को पूरी तरह खाली कराकर उसका समतलीकरण कराया गया। इसके बाद भूमि को पुनः वन विभाग के आधिपत्य में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि कब्जा मुक्त कराई गई भूमि वन संपदा का हिस्सा है, जिसकी सुरक्षा और संरक्षण विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस अभियान में सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी अमेठी कमल नेताम, परिसर रक्षक बोडराबांधा लक्ष्मी कोराम, परिसर रक्षक पाटशिवनी घनश्याम ध्रुव, परिसर रक्षक भैरा युवराज नेताम, परिसर रक्षक अमेठी रामध्वज मौर्य सहित सुरक्षा श्रमिक राधेश्याम साहू, घनश्याम पटेल, हीरालाल यादव, रामेश्वर ठाकुर, भोलाराम साहू, राकेश टोडर और राम यादव ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने लगातार दो दिनों तक मौके पर मौजूद रहकर कार्रवाई को सफलतापूर्वक पूरा किया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन भूमि पर अवैध कब्जे न केवल वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि शासन के निर्देशानुसार वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी वन भूमि पर किसी प्रकार के अवैध कब्जे की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वन भूमि पर अतिक्रमण करने से बचें तथा वन संरक्षण के कार्यों में सहयोग करें। विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ही वन संपदा का संरक्षण संभव है। कब्जा मुक्त कराई गई भूमि पर आगामी समय में वृक्षारोपण एवं अन्य वन संवर्धन कार्य किए जाने की भी योजना है, जिससे क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाया जा सके।

वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में यह संदेश गया है कि वन भूमि पर अवैध कब्जे को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन और वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और वन भूमि की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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