टेंडर पारदर्शिता, FSNL, DMFT-CSR फंड और स्थानीय मुद्दों पर लगे गंभीर आरोप
नगरनार (बस्तर)।
भारत सरकार की नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NMDC नगरनार एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सोमवार को NMDC नगरनार परियोजना के गेट नंबर–1 के सामने ज़ोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एनएमडीसी प्रबंधन पर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं अपनाने, एकपक्षीय तरीके से चहेती कंपनियों को ठेके देने और स्थानीय हितों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए।
धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, किसान और विस्थापित लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाज़ी के ज़रिए एनएमडीसी प्रबंधन से जवाबदेही तय करने की मांग की।
टेंडर प्रक्रिया और FSNL कंपनी पर सवाल
धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कमेटी की ओर से आरोप लगाया गया कि एनएमडीसी नगरनार परियोजना में कई महत्वपूर्ण टेंडर प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाया गया। आरोप है कि टेंडर एकपक्षीय ढंग से अपने करीबी और पसंदीदा ठेकेदारों को दिए गए, जिससे स्थानीय कंपनियों और फर्मों को लगातार नजरअंदाज़ किया गया।
इन्हीं आरोपों के बीच FSNL कंपनी का नाम भी सामने आया, जिसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर किस प्रक्रिया और किस आधार पर ठेके दिए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी टेंडर प्रक्रियाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
विस्थापित किसान, मजदूर और आदिवासी बने धरने का केंद्र
धरना केवल टेंडर विवाद तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विस्थापित किसानों, मजदूरों और आदिवासी समुदाय के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि एनएमडीसी नगरनार परियोजना के कारण जिन लोगों की जमीन गई, आज वही लोग रोज़गार, मुआवज़े और पुनर्वास के लिए भटकने को मजबूर हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं दिया जा रहा है, जबकि बाहरी कंपनियों और श्रमिकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
DMFT और CSR फंड के उपयोग पर उठे सवाल
धरना प्रदर्शन के दौरान DMFT (District Mineral Foundation Trust) और CSR (Corporate Social Responsibility) फंड के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये फंड बस्तर जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्र के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पानी और रोजगार के लिए होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य नजर नहीं आ रहे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी है और जनता को यह नहीं बताया जा रहा कि राशि कहां और कैसे खर्च की जा रही है।
धरना स्थल पर पहुंचे DGM, मीडिया को नहीं मिला जवाब
धरना प्रदर्शन के दौरान एनएमडीसी प्रबंधन की ओर से डीजीएम बाबजी धरना स्थल पर पहुंचे। बताया गया कि वे कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे जाने वाले ज्ञापन से संबंधित औपचारिक बातचीत के लिए आए थे। हालांकि, इस दौरान मौजूद मीडिया कर्मियों ने जब टेंडर, DMFT और CSR फंड से जुड़े सवाल पूछे, तो प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
मीडिया का कहना है कि प्रबंधन ने इन मुद्दों पर खुलकर अपना पक्ष रखने से परहेज़ किया।
NMDC गेट पर मीडिया को रोके जाने का मामला
धरना समाप्त होने के बाद जब विभिन्न समाचार माध्यमों के पत्रकार एनएमडीसी प्रबंधन से औपचारिक रूप से मिलने और उनका पक्ष जानने के लिए गेट के अंदर प्रवेश करने लगे, तो CISF जवानों द्वारा उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया।
पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने SOP का पालन करते हुए गेट पास लेकर अंदर जाकर बातचीत करने की बात कही, लेकिन प्रबंधन की ओर से स्पष्ट संदेश आया कि “मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।”
इन पत्रकारों को रोका गया
इस दौरान जिन पत्रकारों को गेट पर रोका गया, उनमें—
चाणक्य न्यूज़ से सोमेश पानिग्रही,
स्वागत ज़िंदगी न्यूज़ से हेमू साय,
गंगा प्रकाश न्यूज़ के प्रबंध संपादक ओम प्रकाश साहू,
CG वार्ता न्यूज़ से जयशंकर पांडे,
खेमेन सिंह ठाकुर,
और चाणक्य न्यूज़ के कैमरामैन विवेक सोनवानी शामिल रहे।
फोन पर भी नहीं मिला प्रबंधन का स्पष्ट पक्ष
मीडिया द्वारा जब एनएमडीसी प्रबंधन से फोन पर संपर्क किया गया, तो सीनियर मैनेजर अनुज सिंह ने बताया कि डीजीएम मीडिया से बात नहीं करना चाहते। इसके बाद डीजीएम बाबजी से सीधे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और जवाबदेही पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि—
क्या एक सरकारी सार्वजनिक उपक्रम में मीडिया को इस तरह रोका जाना उचित है?
क्या जनता से जुड़े सवालों पर प्रबंधन को खुलकर जवाब नहीं देना चाहिए?
क्या मीडिया से दूरी बनाना पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है?
धरना प्रदर्शन, गंभीर आरोप और मीडिया को रोके जाने की घटना ने NMDC नगरनार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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