होली के दिन रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले-शिकवे भूलके दुश्मन भी गले मिल जाते हैं 

होली पर्व के उमंग और उल्लास के बीच कानून व्यवस्था का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है – संपादक प्रकाश कुमार यादव 

– वर्ष 1975 में रिलीज हुई हिंदी फीचर फिल्म शोले का आनंद बक्शी द्वारा लिखा गया गीत, होली के दिन दिल मिल जाते हैं, रंगों में रंग खिल जाते हैं, गिले-शिकवे भूलके दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते हैं, यह गीत छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने सुने होंगे। हालांकि इसके पूर्व और बाद में भी कई गीता आए पर होली पर्व का यह गीत ही होली का महोत्सव 2023 में हमें ख़ुशी दे रहा है, परंतु समाज के साथ साथ होली का पर्व मनाने के तौरतरीकों में बदलाव के साथ हमारी युवा पीढ़ी पूरी तरीके से भिन्नता की ओर चल पड़ी है जिसमें, फूहड़पन, अश्लीलता और सामाजिक सौहार्दपूर्ण की बिगड़ती स्थिति, मदिरा की धारा, महिलाओं से छेड़खानी सहित अनेकों ऐसे कार्य भी किए जाते हैं जो होली का पर्व मनाने की संस्कृति के बिलकुल खिलाफ़ है। इसलिए ही कुछ राज्य सरकारों द्वारा होली पर्व 2023 के लिए अपनी स्थितियों के अनुसार दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस वर्ष होली का पर्व 7 और 8 दो तारीख को मनाने की ओर स्थितियां चल पड़ी है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, आओ रंगों में सराबोर होकर होली का पर्व शालीनता से मनाएं। होली पर्व के को उमंग और उत्साह के बीच कानून व्यवस्था का पालन करना हर नागरिक का परम कर्तव्य भी है। 

साथियों बात अगर हम आस्था का प्रतीक होली पर्व मनाने की करें तो, भारत में 12 अनोखे प्रकारों से होली पर्व मनाया जाता है, (1) उत्तर प्रदेश में लट्ठमार होली (2)वहरियाणा में धुलंडी होली (3) वृंदावन में फूलों की होली (4) महाराष्ट्र में रंगपंचमी (5) जयपुर में रॉयल होली (6) पश्चिम बंगाल में बसंत उत्सव (7) आनंदपुर, पुंजा में होला मोहल्ला (8) फाल्गुन पूर्णिमा बिहार में (9)तमिलनाडु में कामन पंडिगाई (10) मंजुल कुली, केरल (11) गोवा में शिग्मो (12) मणिपुर में योसांग। होली भारत में सबसे लोकप्रिय और रंगीन त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में बहुत उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। रंगों का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और यह हिंदू महीने फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। भारत में लोग अपने दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों और प्रियजनों के साथ मनाते है।भारत में होली का महत्व रंगों का त्‍योहार होली बुराई पर अच्‍छाई की जीत की प्रतीक है, इसका खास सामाजिक महत्‍व भी है, यह एक ऐसा पर्व होता है जब लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक हो जाते हैं। मान्‍यता है कि इस दिन अगर किसी को लाल रंग का गुलाल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभेद और मतभेद दूर हो जाते हैं, क्‍योंकि लाल रंग प्‍यार और सौहार्द का प्रतीक होता है, इसलिए यह आपसी प्रेम और स्‍नेह बढ़ाता है। होली गीत और संगीत होली एकक ऐसा भारतीय पर्व है जिसका स्‍मरण करते ही कण कण में बिजली का स्पंदन हो जाता है, नस नस में लालसा की लहर दौड़ जाती है, मन-प्राणों पर भावों का सम्मोहक इन्द्रधनुष छा जाता है। मौज और मस्ती, रवानी और जवानी, रंगीनी और मस्ती की एक बहुत ही खूबसूरत यादगारी का नाम है होली।साथियों बात अगर हम होली महोत्सव पर्व में धार्मिक महत्व की करें तो, इस दिन होलिका में सभी तरह की नकारात्‍मक शक्तियों का नाश हो जाता है और सकारात्‍मकता की शुरुआत होती है, होली की रस्में और परंपराएं भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भले ही विविध प्रकार से होली का उत्सव मनाया जाता हो अलग-अलग रस्मों से मनाया जाता हो परंतु सबका उद्देश्य एवं भावना एक ही है-भक्ति, सच्चाई के प्रति आस्था और मनोरंजन। 

साथियों बात अगर हम आस्था की प्रतीक होलिका दहन की कहानी की करें तो, भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद के पिता राक्षसराज हिरणाकश्यप था, जो अपने आप को भगवान मानता था। प्रह्लाद को रास्ते से हटाने के लिए वह उसका वध करना चाहता था। जबकि उसकी बहन को आग से नहीं जलने का वरदान था, राक्षसी होलिका भगवान विष्णु के भक्त और हरिण्यकश्यपु के पुत्र प्रह्लाद को जलाने के लिए, प्रह्लाद को अपने गोद में रखकर आग की धधकती ज्वाला में वह बैठ गई, लेकिन प्रभु की कृपा के कारण होलिका जल गई और विष्णु भक्त प्रह्लाद बच गया  इस कारण से पुरातन काल से ही मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लकड़ी व उपलों से होलिका का निर्माण करना चाहिए और शुभ मुहूर्त में विधि विधान से होलिका दहन करना चाहिए। होलिका दहन के समय भगवान विष्णु व भक्त प्रह्लाद का स्मरण करना चाहिए।पूर्णिमा के रात्रि घटित घटना को लेकर उसी समय से होलिका दहन के बाद रंगों का उत्सव होली उसके दूसरे दिन मनायी जाती है। 

साथियों बात अगर हम यूपी बिहार इत्यादि राज्यों द्वाराहोली महोत्सव के लिए गाइडलाइन जारी करने की करें तो उसमें शोभायात्रा जुलूस में ऐसी कोई भी गतिविधि न हो जो दूसरे सम्प्रदाय के लोगों को उत्तेजित करे। अश्लील,फूहड़ गीत कतई न बजें। माहौल खराब करने वालों को बर्दाश्त ना किया जाए। सीएम नें कहा कि भविष्य में त्योहारों मेंधार्मिक परंपराओं और आस्था को पूरा सम्मान दिया जायेगा किंतु अराजकता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अगले कुछ महीनों में आने वाले होलिकोत्सव, शब-ए-बारात, रमजान, नवरोज़, चैत्र नवरात्र,राम नवमी आदि महत्वपूर्णपर्व-त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन के संबंध में शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला, रेंज, जोन व मंडल स्तर पर तैनात पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक करके आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  देशभर में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। होली के दिन लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर जश्न मनाते हैं,  होली के रंग में कहीं भंग न पड़ जाए, इसके लिए नागरिकों को कुछ नियमों का ध्यान रखना होगा। पुलिस प्रशासन कुछ नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी कर सकती है। होलिका दहन को विवादित स्थलों पर मनाने से पाबंदी लगाई गई है। होली पर्व पर पारंपरिक लोक संगीत के गायन में अश्लील तथा फूहड़ शब्दों का इस्तेमाल करने पर भी प्रतिबंध है। वहीं अश्लील गीतों को लाउडस्पीकर पर बजाए जाते हैं, उसको नहीं बजाने की अपील की गई है। इस महापर्व में किसी व्यक्ति विशेष वर्ग विशेष अथवा संप्रदाय विशेष पर आपत्तिजनक टीका टिप्पणी नहीं करने की भी बात कही गई है। महिलाओं का सम्मान करने की बात कही है। यदि होली के चलते कहीं विवाद होता है तो प्रशासन की तरफ से 112 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किय़ा गया है। बता दें कि होली को लेकर लोग कभी कभी बहुत शोर शराबा एवं मारपीट जैसी घटनाओं को भी अंजाम देते हैं। इसे ही मद्देनजर रखते हुए ये दिशा-निर्देश जारी की गई है। 

होली पर्व में कानून व्यवस्था का पालन करने की करें तो वर्तमान संस्कृति में होली के मायने कुछ बदले हुए महसूस होते जा रहे हैं, जिसमें हुड़दंगाई मदिरापान काजबरदस्त उपभोग, महिलाओं से छेड़खानी, मदिरापान में दुश्मनोंसे दुश्मनी निकालने आपराधिक रंजिश खून खराबा इत्यादि अपराधियों के होने की संभावना के कारण हर वर्ष की तरह होली पर्व 2023 में भी यूपी बिहार सहित अनेक राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्यों के लिए गाइडलाइंस दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें अश्लीलता फूहड़गीत, माहौल खराब न करने, धार्मिक परंपराओं और आस्था का सम्मान करने सहित अनेकों बातों पर ध्यान देने की अपील की गई है उनका उल्लंघन करने पर सख्त कार्यवाही की बात कही गई है, जो ठीक भी है इसलिए हम सभी नागरिकों का परम कर्तव्य है कि कानून व्यवस्था का पालन कर शासन प्रशासन को सहयोग प्रदान करें। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ रंगों में सराबोर होकर होली पर्व शालीनता से मनाएं। होली के दिन रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले-शिकवे भुलके दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। होली पर्व के उमंग और उल्लास के बीच कानून व्यवस्था का पालन करना हर नागरिक का परम् कर्तव्य है।


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