CGNEWS:गरियाबंद से जंगल की बड़ी खबर: तपते जंगल में ‘सोलर शक्ति’ बनी वन्यजीवों की जीवनरेखा, अब नहीं भटकेंगे प्यासे शेर और हिरण!

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। भीषण गर्मी की मार झेल रहे छत्तीसगढ़ के जंगलों में इस बार राहत की ठंडी फुहार बनकर आई है सोलर ऊर्जा। गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक अनोखी और सराहनीय पहल के तहत वन्यजीवों के लिए सोलर पंप से पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे अब उन्हें प्यास बुझाने के लिए जंगल छोड़कर बाहर नहीं आना पड़ेगा।

जहां आसमान से आग बरस रही है, वहां जंगल के भीतर बने ये सोलर वाटर प्वाइंट्स बन चुके हैं जानवरों के लिए जीवनदायिनी छांव। नन्हे हिरण से लेकर जंगल के राजा बाघ तक, अब उसी हरियाली के बीच सुकून से अपनी प्यास बुझा रहे हैं, जहां उनका असली घर है।

पहले सूख रहे थे जलस्रोत, अब सोलर पंप से हरदम बहता पानी

गर्मी शुरू होते ही रिजर्व के अंदरूनी क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक जलस्रोत तेजी से सूखने लगे थे। इससे बाघ, भालू, तेंदुआ और चीतल जैसे जीव अक्सर पानी की तलाश में जंगल के किनारों या गांवों की ओर आने लगे थे, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ रहा था।

इसी चुनौती को देखते हुए वन विभाग ने स्मार्ट रणनीति अपनाते हुए जंगल के भीतर पहले से खोदे गए जलाशयों को सोलर पंप से जोड़ दिया। अब ये पंप दिन भर सौर ऊर्जा से पानी खींचते हैं और जलाशयों में भरते रहते हैं, जिससे जंगल के भीतर भी पानी की कमी नहीं रहती।

“प्रकृति से संघर्ष नहीं, सहअस्तित्व का संदेश”

विभागीय वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो, “हमारा उद्देश्य केवल पानी देना नहीं, बल्कि वन्यजीवों को उनके ही घर में सुरक्षा और सुविधा देना है। सोलर पंप से हम न सिर्फ जंगल को हराभरा बनाए रख रहे हैं, बल्कि यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है।”

तकनीक और संवेदना का मेल

यह पहल बताती है कि आधुनिक तकनीक जब संवेदनशीलता के साथ इस्तेमाल होती है, तो उसका असर केवल मशीनों तक नहीं रहता — वह जीवन बचाती है। गरियाबंद का यह मॉडल अब पूरे राज्य के अन्य जंगल क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

विशेष:

  • रिजर्व में कई जलाशयों को सोलर पंप से जोड़ा गया है।
  • हर पंप प्रतिदिन औसतन 15,000 लीटर पानी उपलब्ध कराता है।

निष्कर्ष:

गरियाबंद के जंगलों से निकली यह गूंज सिर्फ एक खबर नहीं, एक संदेश है — अगर हम चाहें तो इंसान और जानवर दोनों के लिए दुनिया को रहने लायक बना सकते हैं। जहां बिजली नहीं पहुंची, वहां सूरज की रौशनी अब जीवन बन गई है।


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