बिलासपुर/रायपुर(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी जीपी सिंह को बिलासपुर हाईकोर्ट ने राजद्रोह केस में बड़ी राहत दी है। उसने इस केस की प्रोसिडिंग पर ही रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर लिखा है कि CAT के फैसले में भी यह तथ्य सामने आया है कि तत्कालीन ADGP जीपी सिंह को साजिशों और फर्जीवाड़े के तहत फंसाया गया था। हाइकोर्ट ने CAT के फैसले का उल्लेख कर स्वयं भी पाया की तत्कालीन प्रभावशील अधिकारियों ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जीपी सिंह को फंसाने के लिए दस्तावेजों में हेर-फेर, कूटरचना और झूठे सबूत गढ़े गए थे।गौरतलब है कि पूर्ववर्ती भू-पे बघेल सरकार ने IPS जीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था। हालाकि अब अदालत ने इस राजद्रोह के केस प्रोसिडिंग पर ही रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ कैडर के 1994 बैच के IPS जीपी सिंह को बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी बहाली का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही षड्यंत्रकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही का रास्ता भी साफ हो गया है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के सीनियर अधिकारी जीपी सिंह को इसके पूर्व CAT से बड़ी राहत मिली थी। उसने 1 मई 2024 को दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में चार सप्ताह के भीतर पीड़ित जीपी सिंह से जुड़े सभी मामलों को निराकृत कर उनकी बहाली किए जाने का आदेश दिया था। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले से एक बार फिर दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो गया है। अदालत में दो महत्वपूर्ण गवाहों ने शपथ पत्र देकर अपनी आपबीती भी सुनाई है। इस महत्वपूर्ण गवाही में दो पुलिस कर्मियों ने अदालत को बताया कि तत्कालीन SSP रायपुर शेख आरिफ ने झूठे सबूत इकट्ठा कर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए थे।
दोनों गवाहों के मुताबिक पहले तो जीपी सिंह के घर के बाहर स्थित नाली से बतौर सबूत एक डायरी के कटे फटे पन्नों को प्लांट किया गया था, ताकि राजद्रोह का प्रकरण पंजीबद्ध करने के लिए कुछ ना कुछ सबूत गढ़े जा सके। यही नही केस डायरी में प्रस्तुत दस्तावेजों में उनके झूठे बयान और फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे। बता दें कि जुलाई 2023 में तत्कालीन भू-पे सरकार की अनुशंसा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जीपी सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी।

जीपी सिंह के खिलाफ वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजद्रोह का केस दर्ज किया था। हालाकि कुछ दिनों बाद इस मामले में हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। गौरतलब है कि इस फर्जीवाड़े के संज्ञान में आते ही 9 जुलाई 2021 को पीड़ित जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की CBI जांच की मांग की थी। ताजा अदालती घटनाक्रम के बाद षड्यंत्रकारी 2005 बैच के IPS शेख आरिफ के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया है।

बताया जाता है कि शेख आरिफ और उनकी IAS पत्नी ने मिलकर छत्तीसगढ़ शासन की तिजोरी पर करोड़ों का चूना लगाया है। भ्रष्टाचार में लिप्त इस दंपत्ति के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। कोर्ट के ताजा फैसले से नौकरशाही में हर्ष की लहर है।

छत्तीसगढ़ के दागी IPS-IAS शेख आरिफ दंपत्ति के अपराधों की खुलने लगी परतें, अवैध उगाही के लिए भूू-पे और सौम्या के नाक के बाल का कब होगा इस्तकबाल ? पीड़ित कांस्टेबल की शिकायत…

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और आतंक के दंपत्ति शेख़ आरिफ चर्चा में हैं। वर्ष 2005 बैच के इस IPS अधिकारी ने चंद वर्षों में अरबों का साम्राज्य खड़ा कर दिया है, यहां भ्रष्टाचार की फसल लहलहा रही है। सैकड़ो एकड़ खेत में मछली पालन, कृषि और गोदाम के कारोबार से इस दंपत्ति की कमाई आसमान छू रही है। खाकी वर्दी की आड़ में अवैध उगाही और अपराधों का गोरख धंधा ये दंपत्ति खुद संचालित करते थे। महादेव ऐप घोटाले में शेख आरिफ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बताई जाती है। ED की विवेचना में इसका पूरा ब्यौरा दर्ज है। IPS शेख आरिफ की तर्ज पर उनकी IAS पत्नी शम्मी आबिदी के खिलाफ भी कई गंभीर शिकायतें शासन के समक्ष लंबित है।

शम्मी आबिदी वर्ष 2006 की अधिकारी हैं और लखनऊ की रहने वाली है। जबकि शेख आरिफ महाराष्ट्र के पुणे में एक सामान्य परिवार में पले बढ़े और शिक्षित हुए बताए जाते हैं। ऑल इंडिया सर्विस में आने के बाद दोनों पति पत्नी और उनके नाते रिश्तेदारों की संपत्ति दिन दुगनी रात चौगुनी प्रगति कर रही है। काली रकम के निवेश का संचालन इन्हीं दंपत्ति के माध्यम से संचालित बताया जाता है। यह भी बताते हैं कि काली कमाई से बनाई गई इस चल अचल संपत्ति को कुछ चुनिंदा CA चमकाने में जुटे हैं, अर्थात ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में तब्दील करने की कार्यशाला शेख आरिफ द्वारा जोर-शोर से संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी इस दंपत्ति का बड़ा निवेश बताया जाता है।

कांग्रेस के भूू-पे राज में शम्मी आबिदी और शेख आरिफ विशेष मलाईदार पदों पर तैनात रहे हैं। यहां रोजाना लाखों का वारा-न्यारा किया गया है। इनके भ्रष्टाचार का ग्राफ साल दर साल बढ़ते रहा जबकि दूसरी ओर सरकारी धन और योजनाओं का लाभ जरूरतमंदो तक नही पहुंच पाया था। मामला कमीशनखोरी से जुड़ा बताया जाता है। महिला और बाल विकास विभाग, हाऊसिंग बोर्ड और NRDA ऐसे ही निर्माण एजेंसियों में पदस्थ रहकर शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ शासन को करोड़ों का चूना लगाया है। इस दंपत्ति की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है ?

सूत्र बताते हैं कि शम्मी आबिदी की ओर से ठेकेदारी और व्यवसायिक लेने देन का कार्य शेख आरिफ के माध्यम से ही संचालित होता था। ED की छापेमारी में शेख आरिफ और दलालों से जुड़ी कई चैट भी सार्वजनिक हुई है। इससे पता पड़ता है कि इस दंपत्ति की कार्यप्रणाली विवादों में है, वो छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के खिलाफ बताई जाती है। यह भी कहते हैं कि ऐसे अधिकारियों की कार्यप्रणाली के चलते ऑल इंडिया सर्विस पर से जहां जनता का विश्वास उठता जा रहा है, वहीं भारत सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।

राज्य की पूर्ववर्ती लुटेरी सरकार के कार्यकाल में अवैध उगाही, फर्जी F.I.R., साजिश, ACB और EOW में दर्ज भ्रष्ट अधिकारियों के प्रकरणों का एकतरफा खात्मा करने से शेख आरिफ सुर्खियों मे है। इस दंपत्ति की कमाई रोजाना लाखों में बताई जाती है। यह भी बताया जाता है कि तत्कालीन मंत्री मोहम्मद अकबर के भाई असगर के तमाम ठेकों में शम्मी आबिदी साइलेंट पार्टनर के रूप में शामिल थीं। नतीजतन हाऊसिंग बोर्ड और NRDA में गुणवत्ता विहीन कार्य बड़े पैमाने पर किए गए थे। घटिया निर्माण सामग्री से हाऊसिंग बोर्ड में सालाना हजारों मकान बनाए गए थे। यहां सड़कें बनाई गई और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े कई कार्यों को इस दंपत्ति द्वारा अंतिम रूप दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक दागी ठेकेदार असगर के कारोबार में शम्मी आबिदी बराबर की पार्टनर बताई जाती हैं।

पूर्व मंत्री अकबर के भाई असगर ने अटल नगर (नई राजधानी) में बीते 5 वर्षों में हजारों करोड़ का काम सिर्फ कागजों में किया था। इसके कई प्रमाण सामने आए हैं। नतीजतन एक समय वित्तीय रुप से मजबूत संस्था NRDA भू-पे सरकार के इन 5 वर्षों में दिवालिया हो गई है। इसे कंगाल बनाने में शेख आरिफ दंपत्ति की भूमिका चर्चा में है। फिलहाल तो उस पीड़ित कांस्टेबल की गुहार गौरतलब है, जिसने इस दंपत्ति के खिलाफ गृहमंत्री विजय शर्मा से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। छत्तीसगढ़ पुलिस में प्रधान आरक्षक के पद पर तैनात विजय कुमार पांडेय ने शेख आरिफ पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि शेख़ आरिफ द्वारा अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कई कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए गए थे। इसका इस्तेमाल उन IPS अधिकारियों के खिलाफ किया गया था जिनकी पटरी पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल और सौम्या चौरसिया के साथ नही जमती थी। शिकायत में यह भी बताया गया है कि इस दंपत्ति के काले कारनामे खुलने से उनकी जान खतरे में है, अपने बचाव के लिए ये दंपत्ति कई गैर कानूनी कदम उठाने की धमकी दे रहे हैं, वरना मुंह बंद रखो कहा जा रहा है। बहरहाल भू-पे राज में फले-फूले गुनाहों के दंपत्ति के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की जा रही है, ताकि आम जनता को महसूस हो सके की छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचारियों के दिन अब लद गए हैं।


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