फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। क्वार माह का शुभारंभ पितृ पक्ष के रूप में होने से जहां बाजार विरान हो गया है। वही लोग नदियों तालाब आदि में अपने पितर को श्राद्ध कर तर्पण करते देखे जा रहे है। शुभ कार्यो के लिए यह माह पितरो के पूजन के कारण शुभ भी माना जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार जिस तिथि (हिन्दी माह की तिथि) को पितरों की मृत्यु होती है उस तिथि को पितरों का श्राद्ध किया जाता है और पितरों का आव्हान किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के पखवाड़े में पितर कौए के रूप में आकर अपने परिवार के लोगों के द्वारा आव्हान करने पर भोजन ग्रहण करते है। लिहाजा श्राद्ध के दिन पितरों की पसंद का भोजन तैयार किया जाता है और पितरों के लिए थाली में भोजन और पानी छत या घरों की दीवार पर रखा जाता है। पितृ पक्ष के पूर पखवाड़े में भोजन के तैयार होने के बाद एक ब्राम्हण, गाय और कौए के लिए एक-एक थाली सबसे पहले निकाले जाने का नियम है। हिन्दू धर्म के अनुसार पितृ पक्ष को अत्यंत शुभ पखवाड़ा माना जाता है जिसके लिए श्राद्ध के एक दिन पहले से ही लोगों के द्वारा तैयारियां की जाती है। नगर के पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि हिन्दू धर्म के अनुसार पितृ पक्ष को अत्यंत शुभ पखवाड़ा माना जाता है। पितृ पक्ष के बारे में मान्यता है कि इस पखवाड़े में स्वर्ग लोक के द्वार खुले रहते है जिसकी वजह से पितर पृथ्वी लोक आते जाते रहते है। पितृ पक्ष में ब्राम्हण और गाय के साथ ही साथ काग यानि कौए को भी भोजन कराने की परंपरा है। पितृ पक्ष के दौरान इन दिनों नदी, नालों और तालाबों के घाटों में प्रतिदिन सुबह पितरों को तर्पण देने के लिए लोग पहुंच रहे है जहां श्राद्ध के साथ पितरों का पूजन किया जा रहा है। इस वर्ष शुक्रवार 29 सिंतबर से पितृपक्ष प्रारंभ हो गया है जो पूरे 16 दिनों तक रहेगा। 14 तारीख को पितृमोक्ष अमावस्या होगी। हिन्दू धर्म ग्रंथो में पितृ पक्ष को अत्यंत शुभ पखवाड़ा माना जाता है। परंपरा के अनुसार पूरे पखवाड़े भर सुबह स्नान के बाद तालाब, नदी, कुंड या घर पर जौ, तिल और कुश के साथ पितरों को इस पूरे पखवाड़े तर्पण किया जाता है। तर्पण करने वाले व्यक्ति को इस पखवाड़े भर मांस, मदिरा त्याग के साथ ही साथ दाढ़ी और बाल भी नहीं कटवाने का नियम है जिसे इस पखवाड़े भर में व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार पालन करते है। पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि हिन्दू धर्म के अनुसार पितृपक्ष को केवल पितरों को याद करने का पखवाड़ा माना जाता है जिसकी वजह से इन 15 दिनों में विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, नया वाहन, भूमि खरीदी आदि जैसे किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते है। इन 15 दिनों में पितरों को याद करने के साथ ही साथ प्रतिदिन हवन, भजन आदि किए जाने की भी मान्यता है। पितृ पक्ष के दौरान कौए को भोजन कराना बेहद शुभ होता है। प्रतिदिन एक थाली कौए, कुत्ते और गाय के लिए निकालकर रखना चाहिए। यदि किसी कारणवश कौए नहीं आ रहे है तो कौए के लिए निकाली गई थाली को गाय को देना चाहिए। उन्होंने बताया कि 14 तारीख को पितृमोक्ष अमावस्या मनाया जाएगा।
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