फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। नगर पंचायत फिंगेश्वर में एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सीमा ठाकुर को एल्डरमैन बनाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कार्यकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बताया है। विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस निर्णय पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया गया तो संगठन के भीतर असंतोष और बढ़ सकता है तथा कई कार्यकर्ता इस्तीफा देने जैसे कठोर कदम उठाने के लिए भी मजबूर हो सकते हैं।

विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सीमा ठाकुर फिंगेश्वर नगर पंचायत की मतदाता नहीं हैं, बल्कि उनका नाम राजिम नगर पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज है। उनका कहना है कि यदि यह तथ्य सही है तो फिंगेश्वर नगर पंचायत में एल्डरमैन नियुक्ति की पात्रता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित अभिलेखों की जांच कर पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट की जाए ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
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भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीमा ठाकुर को संगठन की ओर से पहले ही कई महत्वपूर्ण दायित्व दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद पार्टी के कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों से पार्टी की विचारधारा के लिए गांव-गांव और वार्ड-वार्ड में मेहनत करने वाले अनेक समर्पित एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। इससे जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं में निराशा और असंतोष का माहौल बन गया है।

कई कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन को ऐसे निर्णय लेने से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को महत्व देना चाहिए था। उनका मानना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता रहती और स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती तो इस प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होता। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन की मजबूती जमीनी कार्यकर्ताओं के परिश्रम से होती है और उनकी उपेक्षा लंबे समय में संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
इस नियुक्ति को लेकर सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू तथा भाजपा जिला अध्यक्ष अनिल चंद्राकर के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों को स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो संगठन के भीतर मतभेद और अधिक गहरा सकते हैं।
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सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय से कई महिला कार्यकर्ता भी नाराज हैं। उनका कहना है कि पार्टी के लिए लंबे समय से सक्रिय रूप से कार्य करने वाली महिला कार्यकर्ताओं को अवसर देने के बजाय ऐसे नामों को प्राथमिकता दी गई है, जिनकी संगठनात्मक सक्रियता पर ही सवाल उठ रहे हैं। कुछ महिला कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए संगठन से इस्तीफा देने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी होती रही तो भविष्य में संगठनात्मक गतिविधियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
नगर में इस नियुक्ति को लेकर लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते संगठन द्वारा स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है। कार्यकर्ता चाहते हैं कि संगठन पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक करे, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच व्याप्त असंतोष दूर हो सके।





