फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश) हमारे देश मे एकता अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अपने आप को समर्पित कर अपने देशवासियों के बीच राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन जन तक पहुंचा कर अपने देश की एकता को बनाए रखने के लिए शपथ ग्रहण करते हैं साथ ही धर्म जाति के अंतर को समाप्त कर सभी देशवासी कदम से कदम मिलाकर राष्ट्र उत्थान के लिए कार्य करेंगे तभी हमारा देश विश्व गुरु की आसंदी पर सुशोभित होगा सभी भारतीयों का उद्देश्य होना चाहिए कि हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं धर्म जाति वेश भाषा चाहे अनेक है इन्हीं पंक्तियों को सभी बच्चों ने गीत के रूप में गायन किया साथ ही कक्षा पांचवी की छात्रा वैशाली मारकण्डे ने अपनी कविता में राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए हमें किन.किन बातों को ध्यान रखना चाहिए और हमें एक रहने के लिए क्या करना चाहिए अपनी कविता के माध्यम से बताई जहां मंदिर में दाना चुग चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है जहां बुद्ध के उपदेश और ईसा मसीह की बलिदान की गाथा होती है फिर क्यों हो गए हम यूं जुदा आज जोड़ने की बात होती है जो की बहुत ही सारगर्भित कविता रहा शिक्षक खोमन सिन्हा ने कहा कि मंजिलें उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है हमारे देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं पूर्व गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे प्रमुख नेताओं में से एक थे उन्होंने अंग्रेजों को भगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद ;गुजरातद्ध ग्राम में एक पटेल परिवार में हुआ था सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म दिवस को ही 31 अक्टूबर 2014 से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं वल्लभभाई पटेल ने छुआछूत जातिवाद महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर अपनी आवाज बुलंद की और सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए काफी प्रयास किया सरदार वल्लभभाई पटेल कई सत्याग्रह भी चलाया जिसके कारण उसे सरदार की उपाधि मिली सरदार वल्लभभाई पटेल की विचार समाज के लिए युवाओं के लिए पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा स्रोत है देश को एकीकरण करने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है इसी कारण खंडित रियासतों को जोड़कर एक राष्ट्र निर्माण करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी व भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शाला के प्रधान पाठक जगन्नाथ ध्रुव घनश्याम कंवर दुर्गेश विश्वकर्मा लीलाराम मतवाले निरूपा निषाद मंदाकिनी साहू शिक्षक खोमन सिन्हा उपस्थित रहे
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