- बड़ी घोषणा: अरिजीत सिंह के बाद अब श्रेया घोषाल ने अपनी गायकी और भविष्य की योजना पर चुप्पी तोड़ी।
- शर्तिया संन्यास: श्रेया ने साफ किया कि अगर वह संगीत में ‘नयापन’ महसूस नहीं करेंगी, तो वह तुरंत माइक छोड़ देंगी।
- फैंस में मायूसी: जिस तरह धोनी के संन्यास ने क्रिकेट जगत को चौंकाया, वैसा ही डर म्यूजिक लवर्स में दिख रहा है।
Shreya Ghoshal Retirement News , नई दिल्ली — भारतीय संगीत जगत में इन दिनों संन्यास की खबरें किसी बड़े खिलाड़ी के मैदान छोड़ने जैसी चर्चा बटोर रही हैं। अरिजीत सिंह द्वारा प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कहने के संकेत देने के बाद अब श्रेया घोषाल के एक हालिया बयान ने हलचल मचा दी है। श्रेया ने स्पष्ट किया कि संगीत उनके लिए केवल एक पेशा नहीं बल्कि जुनून है, और जिस दिन यह जुनून खत्म होगा, वह इस पिच से हट जाएंगी।
“जब नयापन खत्म होगा, मैं गाना छोड़ दूंगी”
श्रेया घोषाल ने अपने करियर के उस मोड़ पर यह बात कही है जहाँ वह शिखर पर हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई बल्लेबाज 100वें शतक के करीब पहुँचकर अचानक बल्ला रख देने की बात करे। उन्होंने संकेत दिया कि वह काम की गुणवत्ता (Quality) पर समझौता नहीं करेंगी। अरिजीत सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह लंबी पारी के बजाय सही समय पर विदा लेना पसंद करेंगे।
“मैं उस दिन गाना छोड़ दूंगी जब मुझे लगेगा कि मैं कुछ नया नहीं सीख रही या संगीत मुझे उत्साहित नहीं कर रहा। मैं केवल संख्या बढ़ाने के लिए पिच पर नहीं टिकना चाहती।”
— श्रेया घोषाल, हालिया इंटरव्यू
म्यूजिक इंडस्ट्री के इन दो ‘पिच हिटर्स’ के बयानों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या अब आर्टिस्ट भी एथलीट्स की तरह अपनी ‘शेल्फ लाइफ’ को लेकर ज्यादा सजग हो गए हैं।
- 20+ साल: श्रेया घोषाल का बेदाग करियर रिकॉर्ड।
- शून्य गिरावट: अरिजीत और श्रेया की लोकप्रियता अभी भी स्ट्राइक रेट 100 के पार बनी हुई है।
- अगली पीढ़ी: इनके हटने से इंडस्ट्री में वैसा ही खालीपन आएगा जैसे सचिन तेंदुलकर के जाने के बाद आया था।
खेल हो या संगीत, चोटी पर रहते हुए संन्यास लेना सबसे कठिन फैसला होता है। अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल का यह रुख दिखाता है कि वे अपनी विरासत (Legacy) को सुरक्षित रखना चाहते हैं। खेल की भाषा में कहें तो, वे ‘फॉर्म’ खराब होने का इंतजार करने के बजाय अपनी शर्तों पर मैच खत्म करना चाहते हैं। यह संगीत उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव है, जहाँ अब कलाकार मात्रा (Quantity) के बजाय प्रभाव (Impact) को तरजीह दे रहे हैं।
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