117 निर्माण कार्य निरस्त, 3.34 करोड़ की वसूली प्रक्रिया, 3.84 करोड़ वेतन विवाद, तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत जांच के घेरे में सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की पदस्थापना पर भी उठे सवाल
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से संचालित योजनाओं में सामने आई अनियमितताओं ने जिले के प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना, विद्यालयों में शौचालय निर्माण, आश्रम-छात्रावासों में स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियां तथा विभागीय कार्यालय में कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर एक के बाद एक सामने आ रहे सरकारी आदेश, जांच नोटिस और प्रशासनिक कार्रवाई यह संकेत दे रहे हैं कि पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान विभाग में कई निर्णय अब गंभीर जांच के दायरे में हैं। इन मामलों में उस समय प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में है। वहीं विभाग में लंबे समय से अटैचमेंट पर कार्यरत सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की भूमिका और पदस्थापना को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत ने जनपद पंचायत गरियाबंद में पदस्थ आशीष कुमार मिश्र सहायक ग्रेड 3 को अपने कार्यालय आदिवासी विकास विभाग अटैक पर लाकर उन्हें देयक शाखा एवं अन्य शाखा की प्रभारी बनाया गया जबकि विभाग में पहले से पदस्थ लेखपाल रमेश कुमार ध्रुव ही शाखा प्रभारी थे जिन्हें शाखा से हटा कर दिया गया और आशीष कुमार मिश्रा को शाखा प्रभारी नियुक्त किया गया और जमकर भ्रष्टाचार किया गया है

सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि अब तक 117 निर्माण कार्य निरस्त किए जा चुके हैं तथा संबंधित ठेकेदारों एवं एजेंसियों से 3 करोड़ 33 लाख 92 हजार 284 रुपये से अधिक की राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दूसरी ओर आश्रम-छात्रावासों में अतिरिक्त नियुक्तियों के कारण 3 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक के वेतन भुगतान का विवाद अलग खड़ा है। इन घटनाक्रमों ने आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जांच समिति ने तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत को किया तलब
मामले में सबसे बड़ा घटनाक्रम जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा जारी 30 जुलाई 2026 का नोटिस है। जांच समिति ने तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत को 3 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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नोटिस में उल्लेख किया गया है कि स्कूल जतन योजना के निर्माण कार्यों में शिकायतें प्राप्त हुई थीं तथा समाचार पत्रों में भी इन मामलों का प्रकाशन हुआ था। इसके बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के आदेश से जांच समिति गठित की गई। समिति ने पहले भी नवीन कुमार भगत को दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। अब तीसरी और अंतिम नोटिस जारी किया गया वा नवीन कुमार भगत के बंगले पर नोटिश चशपा कर दिया गया है नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
केस-1 : स्कूल जतन योजना में 24 निर्माण कार्य निरस्त, 2.88 करोड़ की वसूली
मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत जिले में लगभग 995 निर्माण एवं मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से करीब 830 कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) द्वारा समय पर पूर्ण कर लिए गए, लेकिन आदिवासी विकास विभाग को सौंपे गए 165 कार्यों में से 50 से अधिक आज भी अधूरे बताए जा रहे हैं।
6 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार कम प्रगति वाले 24 निर्माण कार्यों को निरस्त कर दिया गया। संबंधित तीन फर्मों—मैसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन (महासमुंद), अजय कुमार राठौर (कोरबा) तथा जयनारायण यादव विकास कंस्ट्रक्शन (कोरबा)—से कुल 2 करोड़ 88 लाख 7 हजार रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में सात दिन के भीतर राशि जमा नहीं करने पर एफआईआर दर्ज कराने तथा राजस्व वसूली की कार्रवाई का उल्लेख भी किया गया है।
पूर्व जिला पंचायत शिक्षा समिति अध्यक्ष संजय नेताम का आरोप है कि स्थानीय ठेकेदारों की अनदेखी कर बाहरी एजेंसियों को काम दिया गया, जिससे कार्य समय पर पूरे नहीं हो सके और आज भी कई स्कूल अधूरे निर्माण का खामियाजा भुगत रहे हैं।

केस-2 : 116 स्कूलों के शौचालयों के लिए 61.88 लाख अग्रिम, केवल 23 कार्य पूरे
दूसरा बड़ा मामला विद्यालयों में शौचालय निर्माण का है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत 116 विद्यालयों में नए शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए लगभग एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। निर्माण एजेंसी आदिवासी विकास विभाग को बनाया गया और दुर्ग की एक निजी निर्माण कंपनी को 61 लाख 88 हजार रुपये अग्रिम भुगतान कर दिया गया।
सरकारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार लगभग 10 माह बीतने के बाद भी केवल 23 शौचालयों का निर्माण पूरा हो पाया, जबकि 93 कार्य शुरू तक नहीं हुए।
इसके बाद कलेक्टर कार्यालय ने 6 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर 93 अप्रारंभ कार्य निरस्त करते हुए 45 लाख 85 हजार 284 रुपये वापस जमा कराने के निर्देश दिए। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं होने पर राजस्व वसूली प्रकरण तैयार कर संपत्ति कुर्की सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा निर्माण कार्य भी उस अवधि में स्वीकृत और संचालित हुआ जब विभाग की जिम्मेदारी तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत के पास थी।
केस-3 : 255 स्वीकृत पद, 513 नियुक्तियां और 3.84 करोड़ का वेतन विवाद
आदिवासी विकास विभाग से जुड़ा तीसरा बड़ा मामला आश्रम-छात्रावासों में अतिरिक्त नियुक्तियों का है। जानकारी के अनुसार जिले के 79 आश्रम-छात्रावासों में 255 स्वीकृत पदों के विरुद्ध लगभग 513 चपरासियों की नियुक्ति कर दी गई। आरोप है कि कई नियुक्तियां मौखिक निर्देशों के आधार पर हुईं और कई मामलों में प्रभावशाली लोगों की अनुशंसा पर भर्ती की गई।
बाद में जब अतिरिक्त कर्मचारियों को हटाया गया तो वेतन भुगतान का विवाद खड़ा हो गया। कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत मांगपत्र के अनुसार 3 करोड़ 84 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। कर्मचारी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं और यह मामला आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की पदस्थापना पर भी सवाल
इन सभी मामलों के बीच अब जनपद पंचायत गरियाबंद में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की पदस्थापना भी विवादों में आ गई है।
आरोप है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत ने अपने कार्यकाल के दौरान जनपद पंचायत गरियाबंद से आशीष मिश्रा सहायक ग्रेड 03 को अटैचमेंट के माध्यम से सहायक आयुक्त कार्यालय में कार्यरत रखा। आरोप यह भी है कि उन्हें केवल लिपिकीय कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विभाग की कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभारी बनाकर वित्तीय, निर्माण और प्रशासनिक कार्यों का दायित्व भी सौंपा गया। जबकि विभाग में पहले से पदस्थ लेखपाल ग्रेड 02 रमेश कुमार ध्रुव प्रभारी रहे उन्हें बिना कोई विभागीय दस्तावेजी कार्यवाही कर शाखा से हटा दिया गया है और आशीष कुमार मिश्रा को एक तरफ प्रभार सौंपा गया है

वर्तमान में शाखा में उनके पदस्थ रहते हुए उन्ही के शाखा के विरुद्ध जांच किया जा रहा है जो की एक बड़ी सवालिया निशान खड़े करते हैं कि जीन अधिकारी और कर्मचारी के कार्यकाल में करोड़ों रुपए की भ्रष्टाचार किया गया और उनके पदस्थ रहे ही उन्हीं की शाखा की जांच किए जा रहे हो तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की जांच कितनी प्रभावी वा निष्पक्षता से जांच किया जा रहा होगा।
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यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत लंबे समय तक उन्हें मूल पदस्थापना से अलग रखकर सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ रखा गया।
जांच के दौरान उसी कार्यालय में पदस्थ रहने पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार आदिवासी विकास विभाग से जुड़े जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें आशीष मिश्रा सहायक ग्रेड 03 से संबंधित दस्तावेजों और कार्यों की भी जांच की जा रही है। इसके बावजूद उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल जनपद पंचायत गरियाबंद वापस नहीं भेजा गया है और वे अभी भी सहायक आयुक्त कार्यालय में कार्यरत बताए जा रहे हैं।
यही कारण है कि प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब किसी कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में हो, तब उसे उसी कार्यालय में बनाए रखना क्या जांच की निष्पक्षता के अनुरूप माना जा सकता है?
कुछ लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारी को मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाना चाहिए, ताकि जांच से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों की निष्पक्षता पर कोई प्रश्न न उठे। हालांकि, आशीष मिश्रा के विरुद्ध आरोपों पर अभी किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है।
अब पूरे जिले की नजर जांच पर
एक ओर करोड़ों रुपये की वसूली की कार्रवाई चल रही है, दूसरी ओर निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। अतिरिक्त नियुक्तियों का वित्तीय बोझ अलग है और अब जांच समिति ने तत्कालीन सहायक आयुक्त एवं तत्कालीन कलेक्टर नवीन कुमार भगत को भी तलब कर दिया है। ऐसे में यह मामला गरियाबंद जिले के सबसे चर्चित प्रशासनिक प्रकरणों में शामिल हो गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल नोटिस, वसूली और दस्तावेजी कार्रवाई तक सीमित रहेगी, या फिर जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।
पक्ष जानने का प्रयास
इस संबंध में जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए कलेक्टर भगवान सिंह उईके तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रखर चंद्राकर से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों अधिकारियों द्वारा फोन रिसीव नहीं किए जाने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।




