चुनावी वादे और कमेटी की घोषणा के बावजूद अब तक नहीं हुआ निर्णय, आंदोलन की चेतावनी
छुरा (गंगा प्रकाश)। ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण का वादा किए जाने के बावजूद अब तक मांग पूरी नहीं होने से पंचायत सचिव संगठन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द ही अपने चुनावी वादे को पूरा नहीं किया तो प्रदेशभर के पंचायत सचिव फिर से आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर होंगे।
पंचायत सचिव संघ ब्लॉक इकाई छुरा के अध्यक्ष चेतन सोनकर ने बताया कि वर्ष 2023 में भाजपा की सरकार बनने से पहले जारी चुनावी घोषणा पत्र में ग्राम पंचायतों में कार्यरत सचिवों को सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर शासकीयकरण करने का वादा किया गया था। सरकार को सत्ता में आए ढाई वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
👉 जरूर पढ़ें:आरोपों की लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला, घनश्याम नारंग समेत परिवार के सभी सदस्य दोषमुक्त
उन्होंने कहा कि 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री के समक्ष पंचायत सचिवों ने अपनी मांग रखी थी। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा सचिवों के शासकीयकरण के संबंध में कमेटी गठित कर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। संगठन का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सचिव संगठन का कहना है कि बार-बार कमेटी गठित किए जाने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और उन्हें केवल आश्वासन देकर उनकी मांग को टाला जा रहा है।

सरकार को दिया आंदोलन का संकेत
जिला पंचायत सचिव संघ गरियाबंद के अध्यक्ष प्रवीण साहू ने कहा कि पंचायत सचिव अपने शासकीयकरण की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। यदि सरकार चुनावी घोषणा के अनुरूप पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं देती है तो संगठन शासन के विभिन्न कार्यों के बहिष्कार सहित पुनः आंदोलनात्मक कदम उठाने पर विचार करेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री को पंचायत सचिवों की एक सूत्रीय मांग पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए। संगठन का दावा है कि प्रदेश में करीब 11 हजार पंचायत सचिव ग्राम पंचायत स्तर पर शासन की योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
29 विभागों के 200 से अधिक कार्यों का जिम्मा
सचिव संघ का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिवों के जिम्मे केवल पंचायत के सामान्य प्रशासनिक कार्य ही नहीं हैं, बल्कि करीब 29 विभागों से संबंधित 200 से अधिक प्रकार के कार्यों का संचालन और योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी रहती है। शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत सचिव को महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए संगठन ने कहा कि कार्य की प्रकृति ऐसी है कि सचिवों के लिए निश्चित कार्य समय निर्धारित नहीं है।
संगठन के अनुसार पंचायत स्तर पर योजनाओं, ऑनलाइन पोर्टल, हितग्राही संबंधी कार्य, पंचायत के दस्तावेज, बैठकों तथा विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों के कारण सचिवों को सुबह से देर रात तक काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और भविष्य को लेकर लंबे समय से निर्णय लंबित है।

ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर भी नाराजगी
पंचायत सचिवों ने जिले में ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर भी आपत्ति जताई है। जिला अध्यक्ष प्रवीण साहू के अनुसार गरियाबंद जिले में पंचायत सचिवों को ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बाध्य किया जा रहा है और इस संबंध में अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। संगठन इसे अनुचित बताते हुए जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहा है।
👉 जरूर पढ़ें: कंधों पर यूरिया की बोरी… आगे-आगे बज रहे थे ढोल! आखिर गांव में ऐसा क्या हुआ?
सचिव संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ऑनलाइन उपस्थिति के नाम पर सचिवों को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया तो संगठन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी आवाज उठाएगा और आवश्यकता पड़ने पर लामबंद होकर आंदोलन करेगा।
‘वादे के अनुरूप फैसला करे सरकार’
पंचायत सचिव संघ के जिला अध्यक्ष प्रवीण साहू और छुरा ब्लॉक अध्यक्ष चेतन सोनकर ने मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री से मांग की है कि सरकार अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा करते हुए ग्राम पंचायतों में कार्यरत लगभग 11 हजार पंचायत सचिवों का शीघ्र शासकीयकरण करे।
संगठन का कहना है कि पंचायत सचिवों ने शासन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अब सरकार को भी उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए। सचिवों ने संकेत दिया है कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।





