तिरंगा चौक पर फिर याद आए गरीबों के मसीहा डॉ. अब्दुल रज्जाक मेमन
पुण्यतिथि पर कैंडल जलाकर दी श्रद्धांजलि, सेवा की मिसाल और आखिरी विदाई के किस्से सुनकर भावुक हुए लोग
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। आठ साल बीत गए… लेकिन गरियाबंद के लोगों की यादों में डॉ. अब्दुल रज्जाक मेमन आज भी उतने ही जीवंत हैं। शनिवार शाम नगर के तिरंगा चौक पर जब उनकी आठवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ तो पुरानी यादें फिर ताजा हो गईं। डॉ. मेमन के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए, कैंडल जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके सेवा भाव को याद करते हुए कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
डॉ. अब्दुल रज्जाक मेमन को गरियाबंद में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए समर्पित चिकित्सक के रूप में याद किया जाता है। उनके बारे में लोगों का कहना है कि उन्होंने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं माना, बल्कि इसे इंसानियत की सेवा का माध्यम बनाया। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज में वे अपनी ओर से भी मदद करते थे। जरूरत पड़ने पर दवाइयों के लिए आर्थिक सहयोग करने से भी पीछे नहीं हटते थे।

जब डॉक्टर से ज्यादा परिवार का सदस्य बन गए थे मेमन
डॉ. मेमन की पहचान केवल अस्पताल या क्लीनिक तक सीमित नहीं थी। नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। बीमारी के समय इलाज के साथ-साथ वे लोगों के सुख-दुख में भी सहभागी बनते थे। यही वजह थी कि आधी रात को भी किसी जरूरतमंद को उनकी मदद की उम्मीद रहती थी।
👉 जरूर पढ़ें:जैसे ही मंच पर बदला मां का रूप, थम गईं हजारों निगाहें… गांधी मैदान में आधी रात तक गूंजते रहे जयकारे
लोगों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में न जाने कितने मरीजों का उपचार किया और कितने परिवारों को संकट के समय सहारा दिया। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनके साथ जुड़े लोगों के पास उनकी सेवा और सरल व्यवहार से जुड़े अनेक संस्मरण हैं।
19 सितंबर 2018… वह दिन जब पूरा गरियाबंद रो पड़ा था
डॉ. अब्दुल रज्जाक मेमन के जीवन की सेवा यात्रा का अंत 19 सितंबर 2018 को हुआ। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे गरियाबंद में शोक की लहर दौड़ गई थी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े थे। नगर की सड़कों पर उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दी थी।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग अपने प्रिय चिकित्सक को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। उस दिन गरियाबंद ने केवल एक डॉक्टर को नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान को खोया था, जिसने जरूरतमंदों की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था।

मित्र साबिर भाई की आंखों से छलके आंसू
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान डॉ. मेमन के करीबी मित्र साबिर भाई उन्हें याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि डॉ. मेमन हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनके विचार आज भी लोगों के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं डॉ. मेमन को जरूरतमंद मरीजों का इलाज करने के बाद दवा खरीदने के लिए आर्थिक सहायता करते देखा है। उनका जीवन सादगी और सेवा का उदाहरण था। उनके विचार आज भी युवाओं को जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं।
गरीबों के मसीहा थे डॉ. मेमन
पार्षद छगन यादव ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. अब्दुल रज्जाक मेमन वास्तव में गरीबों के मसीहा थे। उन्होंने अपना जीवन जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सेवा भाव और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
👉 जरूर पढ़ें:बिस्तर पर बेबस पड़ा अज्ञात मरीज… आखिर किसके भरोसे है इलाज?
कार्यक्रम में साबिर वकील, राम कुमार वर्मा, हरीश ठाकुर, मनोज वर्मा, राजेश साहू, वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश तिवारी, नंद किशोर फुलझेले, चंद्र भूषण चौहान, पार्षद छगन यादव, योगेश बघेल, जुनेद खान, सन्नी मेमन, बीरेंद्र सेन, अवध यादव, पूना यादव, अमन दास मानिकपुरी, मुकेश भोई, चंदन सिन्हा, सौरभ यादव, कादर हिंगोरा,जलाराम ठाकुर, मुकेश यादव, युगल सोनी, बाजीराम सेन, डाल सिंग साहु,घनश्याम यादव सहित बड़ी संख्या में नगर के प्रबुद्धजन एवं नागरिक मौजूद रहे।
आठ साल बाद भी डॉ. मेमन की याद में आंखों का नम होना बताता है कि कुछ रिश्ते समय के साथ खत्म नहीं होते। डॉ. मेमन के लिए चिकित्सा केवल पेशा नहीं थी—वह उनके लिए इंसानियत की सेवा थी। यही सेवा भाव आज भी गरियाबंद की स्मृतियों में उन्हें जीवित रखे हुए है।





