गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। ग्राम पंचायत बोड़की में महज 0.10 हेक्टेयर भूमि को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने ग्रामीणों और परमेश्वर साहू परिवार को आमने-सामने ला दिया है। विवादित खसरा नंबर 177 की जमीन को लेकर एक पक्ष इसे शासकीय घास मद की भूमि बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अपनी पुश्तैनी आबादी से लगी जमीन बता रहा है। 24 सितंबर को निर्माणाधीन बाउंड्रीवाल तोड़े जाने के बाद मामला और गरमा गया है। अब दोनों पक्षों की शिकायतों और दावों के बीच वास्तविक स्थिति राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालयीन दस्तावेजों से स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का दावा—शासकीय भूमि पर हो रहा निर्माण
ग्रामवासियों और ग्राम विकास समिति का कहना है कि ग्राम बोड़की प.ह.नं. 14 स्थित खसरा नंबर 177 का रकबा 0.10 हेक्टेयर है और यह शासकीय घास मद की भूमि है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले ग्राम स्तर पर सर्वसम्मति से इस भूमि को बस स्टैंड, सार्वजनिक शौचालय, यात्री प्रतीक्षालय और लघु वनोपज सहकारी समिति भवन सहित अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने का निर्णय लिया गया था।
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ग्रामीणों का आरोप है कि परमेश्वर साहू और उनकी बहू यशोदा बाई साहू द्वारा उक्त भूमि पर अतिक्रमण कर पक्की बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा था। ग्राम पंचायत के सरपंच नेतराम सिन्हा के अनुसार पंचायत की ओर से पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 56 के तहत तीन बार नोटिस भी जारी किए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और शिकायतों के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

महिलाओं के नेतृत्व में टूटी बाउंड्रीवाल
विवाद उस समय और बढ़ गया जब 24 सितंबर को ग्रामीणों की बैठक के बाद निर्माणाधीन बाउंड्रीवाल हटाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौके पर पहुंचे और महिलाओं के नेतृत्व में कुदाल व हथौड़े से बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया गया।
ग्रामीणों ने फिंगेश्वर थाना प्रभारी को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि मौके पर साहू परिवार के सदस्य लाठी-डंडे लेकर मौजूद थे। उनका कहना है कि बहस और विवाद की स्थिति बनी, लेकिन मारपीट नहीं हुई। ग्रामीणों ने परिवार की ओर से की गई मारपीट की शिकायत को गलत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
साहू परिवार ने बताया पुश्तैनी जमीन
दूसरी ओर परमेश्वर साहू और यशोदा बाई साहू ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन को जानबूझकर शासकीय भूमि बताकर उन्हें अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है, जबकि जमीन उनकी पुश्तैनी आबादी से लगी हुई है और परिवार लंबे समय से वहां निवास करता आ रहा है।
साहू परिवार का कहना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति ग्राम स्तर पर किए गए किसी दावे से नहीं, बल्कि राजस्व अभिलेखों की जांच से स्पष्ट होगी। परिवार के अनुसार भूमि विवाद को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय में प्रकरण दायर किया है और उन्हें तीन माह का स्थगन आदेश प्राप्त हुआ था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद 24 सितंबर को ग्रामीणों ने निर्माणाधीन बाउंड्रीवाल तोड़ दी।

महिलाओं से छेड़छाड़ का भी आरोप
साहू परिवार ने ग्रामीणों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिला-पुरुष लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। परिवार के अनुसार निर्माण बचाने का प्रयास करने पर गाली-गलौज, मानसिक प्रताड़ना और परिवार की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई। इस संबंध में फिंगेश्वर थाने में शिकायत किए जाने की बात कही गई है।
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परिवार ने पंचायत और ग्राम विकास समिति से जुड़े कुछ लोगों पर सामाजिक बहिष्कार, झूठे मामलों में फंसाने और मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप भी लगाया है। उनके अनुसार इस संबंध में सखी सेंटर गरियाबंद और कलेक्टर कार्यालय में पूर्व में शिकायत की जा चुकी है।
अब रिकॉर्ड और न्यायालयीन आदेश पर टिकी निगाहें
दोनों पक्षों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीण शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चाहते हैं, जबकि परमेश्वर साहू परिवार राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने, बाउंड्रीवाल टूटने से हुए नुकसान का मुआवजा और शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग कर रहा है।
फिलहाल विवाद के केंद्र में खसरा नंबर 177 है। एक तरफ शासकीय घास मद की भूमि होने का दावा है, तो दूसरी तरफ पुश्तैनी जमीन का पक्ष रखा गया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट में प्रकरण और स्थगन आदेश होने का दावा भी सामने आया है। ऐसे में अब राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालयीन आदेश और दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और 24 सितंबर की घटना में कानूनी रूप से किसकी भूमिका बनती है।





