15 नवंबर से शुरू होगी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, सीमावर्ती खरीदी केंद्रों पर विशेष निगरानी, राइस मिलों से लेकर धान के स्टॉक तक की होगी जांच
देवभोग (गंगा प्रकाश)। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सीजन शुरू होने से पहले ही गरियाबंद जिले में अवैध धान की आवक रोकने के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। दूसरे राज्यों से धान लाकर स्थानीय किसानों के पंजीकृत रकबे में बेचने की संभावित गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए जिले में 30 चेकपोस्ट बनाए गए हैं। वहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में 273 चेकपोस्ट निर्धारित किए गए हैं। सीमावर्ती इलाकों से लेकर धान खरीदी केंद्रों और राइस मिलों तक निगरानी का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। अब सवाल यह है कि खरीदी के दौरान निगरानी की यह व्यवस्था अवैध धान के कारोबार पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाएगी?
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इसे लेकर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 21 अक्टूबर 2026 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शासन का जोर खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा करने और दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर खपाने की कोशिशों को रोकने पर है। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी के साथ अवैध परिवहन, भंडारण और खरीदी में अनियमितताओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सीमावर्ती खरीदी केंद्रों पर रहेगी खास नजर
गरियाबंद जिले में सीमावर्ती धान उपार्जन केंद्रों को विशेष निगरानी के दायरे में रखा गया है। सूची में रसैला, छुरा, कोसमी, दुल्ला, इंदागांव, बूरजाबहाल, झाखरपारा, ढोर्रा, तेतलखूंटी, खुटगांव, पीटापारा, नागलडीही, खोखसरा, उरमाल, बंदियामल, बरही और सीनापाली सहित कुल 15 केंद्रों के नाम शामिल हैं। इन केंद्रों पर खरीदी के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की तैयारी है। निगरानी का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाहरी राज्यों से लाया गया धान स्थानीय किसानों के पंजीकृत रकबे की आड़ में समर्थन मूल्य पर न बेचा जा सके।
धान और बारदानों का होगा भौतिक सत्यापन
धान खरीदी केंद्रों में केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर व्यवस्था नहीं चलेगी, बल्कि भंडारित धान और बारदानों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। कलेक्टर द्वारा प्रत्येक खरीदी केंद्र के लिए अधिकारियों को नामांकित किया जाएगा, जो मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्टॉक और अभिलेखों का मिलान करेंगे। रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और मौके पर उपलब्ध धान में अंतर मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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निर्देशों के अनुसार, शासकीय अवकाश को छोड़कर सोमवार से शुक्रवार तक धान खरीदी की जाएगी। प्रत्येक शनिवार को खरीदे गए धान की मात्रा, बारदानों के उपयोग तथा उपार्जन के लिए प्राप्त राशि के व्यय का विवरण खरीदी सॉफ्टवेयर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे खरीदी प्रक्रिया में रिकॉर्ड की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

राइस मिलों के स्टॉक और बिजली खपत पर भी नजर
धान खरीदी में संभावित अनियमितताओं को रोकने के लिए राइस मिलों की जांच भी की जाएगी। सरकारी और निजी धान के स्टॉक, तैयार चावल तथा बिजली खपत से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। जांच के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या स्टॉक में अंतर सामने आने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इस व्यवस्था के जरिए धान की आवक, मिलिंग और भंडारण से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।
कोचियों और बिचौलियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
शासन ने गांवों और शहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से धान खरीदने वाले कोचियों एवं बिचौलियों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई व्यक्ति दूसरे किसानों का धान लाकर किसी पंजीकृत किसान के रकबे में बेचने का प्रयास करता है, तो संबंधित वाहन और धान जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
इसके लिए कलेक्टरों को राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन और परिवहन विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये दल अवैध धान परिवहन, भंडारण और खरीदी से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी रखेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों में जांच और चेकपोस्ट की भूमिका इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दूसरे राज्यों से धान लाने के लिए अनुमति जरूरी
शासन के निर्देशानुसार 15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक दूसरे राज्यों से धान का आयात खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संचालक की अनुमति से ही किया जा सकेगा। हालांकि, 3300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाली सुपर फाइन किस्म के धान के आयात के लिए संचालक की अनुमति से छूट दी गई है। ऐसी स्थिति में संबंधित जिला खाद्य अधिकारी अथवा खाद्य नियंत्रक को सूचना देना अनिवार्य होगा।
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धान खरीदी शुरू होने से पहले चेकपोस्ट की व्यवस्था, सीमावर्ती खरीदी केंद्रों की निगरानी, भौतिक सत्यापन और विशेष जांच दलों के गठन पर जोर दिया जा रहा है। अब खरीदी सीजन में इन तैयारियों की वास्तविक परीक्षा होगी। निगरानी कितनी मुस्तैद रहती है और अवैध धान की आवक पर कितना अंकुश लगता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल शासन की इस सख्ती से धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता और वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा की उम्मीद की जा रही है।





