गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। राजनीतिक पद, सामाजिक रसूख और जनप्रतिनिधि होने का दावा… लेकिन हकीकत में आधी रात अवैध महुआ शराब की तस्करी! फिंगेश्वर पुलिस की देर रात की कार्रवाई ने न सिर्फ अवैध शराब के नेटवर्क को बेनकाब किया, बल्कि जिले की राजनीति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। छुरा रोड पर की गई इस सनसनीखेज कार्रवाई में भाजपा मंडल कोपरा के मंत्री एवं ग्राम सहसपुर के सरपंच पति, पूर्व जनपद सभापति समेत कुल पांच आरोपियों को भारी मात्रा में कच्ची महुआ शराब के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना से मची हलचल
शुक्रवार की रात फिंगेश्वर थाना पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ प्रभावशाली लोग सफेद रंग की चारपहिया सुमो गोल्ड वाहन में भारी मात्रा में कच्ची महुआ शराब भरकर छुरा रोड से होते हुए ग्राम छुईया की ओर ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम अलर्ट मोड में आ गई। तत्काल ग्राम जमाही के शिव मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर नाकाबंदी कर दी गई और आने–जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की सघन जांच शुरू कर दी गई।
नाकाबंदी में फंसी “रसूखदार” गाड़ी
कुछ ही देर में मुखबिर के बताए हुलिए की सुमो गोल्ड (क्रमांक सीजी 04 केपी 7736) पुलिस के जाल में फंस गई। वाहन को रोककर जब तलाशी ली गई, तो पीछे रखी दो बड़ी प्लास्टिक जरकीनों ने पुलिस को चौंका दिया। 35–35 लीटर क्षमता वाली इन जरकीनों में कच्ची महुआ शराब भरी हुई थी। मौके पर ही अवैध शराब को जब्त कर वाहन सीज कर दिया गया।

नाम सामने आते ही मचा हड़कंप
पुलिस पूछताछ में चालक ने अपना नाम खिलेश साहू पिता परसराम साहू (30 वर्ष) बताया। वाहन में सवार अन्य लोगों की पहचान घनाराम साहू (32 वर्ष), नरसुराम ध्रुव (44 वर्ष), त्रिलोकी वर्मा (28 वर्ष) और डिगेश साहू (31 वर्ष) के रूप में हुई। नरसुराम ध्रुव का नाम सामने आते ही मामला और भी गंभीर हो गया, क्योंकि वह भाजपा मंडल कोपरा के मंत्री बताए जा रहे हैं और ग्राम सहसपुर के सरपंच के पति भी हैं। वहीं, आरोपियों में पूर्व जनपद सभापति की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी।
अवैध शराब नेटवर्क की परतें खुलने के संकेत
कड़ी पूछताछ में सभी आरोपियों ने अवैध रूप से कच्ची महुआ शराब का परिवहन करना स्वीकार किया। पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पांचों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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राजनीति और शराब तस्करी का खतरनाक गठजोड़?
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है? ग्रामीण इलाकों में महुआ शराब से हो रही मौतें, अपराध और सामाजिक बुराइयों के बीच जब रसूखदार नाम इस धंधे में सामने आते हैं, तो प्रशासन और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी उंगलियां उठना लाजमी है।
पुलिस का सख्त संदेश
फिंगेश्वर पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई चैन और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि कानून के आगे न पद चलेगा, न रसूख — अवैध कारोबार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
इस धमाकेदार कार्रवाई के बाद जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग यह देखने को उत्सुक हैं कि आगे जांच में और कौन-कौन से नाम बेनकाब होते हैं।

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