Mangalwar Tips, 06 जनवरी 2026 – कलियुग के शोर और अनिश्चितताओं के बीच, एक ऐसी शक्ति है जिस पर करोड़ों लोगों का अटूट विश्वास टिका है। साल 2026 का पहला मंगलवार महज कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उन भक्तों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो बजरंगबली की शरण में अपनी समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं।
SDO Bribe Case : अमृत जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार, SDO पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप
श्रद्धा की शक्ति और हनुमान चालीसा का विधान
हनुमान जी को इस युग का ‘जागृत देव’ माना जाता है, जो अपने भक्तों के पुकारने पर पलक झपकते ही संकट हर लेते हैं। यद्यपि हनुमान चालीसा का पाठ घर-घर में गूंजता है, लेकिन इस नए साल के शुरुआती मंगलवार पर साधकों का ध्यान इसकी ‘विधि’ और ‘नियमों’ पर केंद्रित है। अध्यात्म के जानकार बताते हैं कि जब पाठ सही अनुष्ठान के साथ किया जाता है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।
इस शुभ अवसर पर भक्त केवल पाठ ही नहीं कर रहे, बल्कि वीर हनुमान को प्रसन्न करने के लिए तुलसी की माला, केसरिया लड्डुओं का भोग और चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित कर रहे हैं। यह समर्पण उस दुर्लभ मनोकामना की पूर्ति के लिए है, जिसे भक्त नए साल के संकल्प के रूप में देख रहे हैं।
आस्था के गहरे मायने: सिर्फ रस्म नहीं, एक आत्मिक यात्रा
आज के भागदौड़ भरे जीवन में इस तरह के धार्मिक आयोजन केवल परंपरा का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति का स्रोत बन गए हैं। राम भक्त हनुमान की पूजा में चमेली के तेल की खुशबू और मंत्रों का जाप एक ऐसा वातावरण तैयार करता है, जहाँ भक्त अपने जीवन के अवरोधों को दूर होते हुए महसूस करता है। यह आध्यात्मिक अनुशासन व्यक्ति को आने वाले पूरे साल के लिए धैर्य और साहस प्रदान करता है।
विद्वानों का मत
“कलियुग में हनुमान जी ही संकटों को तुरंत हरने वाले देवता हैं। अगर सही विधि से हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए, तो जीवन के सभी दुखों का नाश निश्चित है।”
There is no ads to display, Please add some


