सुबह से नदी में ट्रैक्टरों की आवाजाही, स्कूल बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी सवाल, एसडीएम विशाल महाराणा बोले—जानकारी मिलते ही कार्रवाई की जा रही है
छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोसमबूढ़ा घाट में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह होते ही नदी क्षेत्र में ट्रैक्टर पहुंचने लगते हैं और रेत भरकर वाहनों का आवागमन शुरू हो जाता है। मौके की सामने आई तस्वीरों में भी नदी के रेत क्षेत्र में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिखाई दे रही हैं।
पिछले दिनों इस मामले को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद उम्मीद थी कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करेगा, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह करीब 5 बजे से ही फिर ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो जाती है। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच कभी भी गंभीर सड़क हादसा हो सकता है।

मुख्यालय के इतने करीब, फिर भी सवालों के घेरे में निगरानी
कोसमबूढ़ा घाट छुरा मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद यदि नदी में बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन और परिवहन हो रहा है तो यह प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से रेत निकासी की गतिविधियां चल रही हैं और जिम्मेदार विभागों की प्रभावी निगरानी दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि संबंधित घाट पर उत्खनन वैध है अथवा नहीं, यह अनुमति, ई-टीपी, अभिवहन दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
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खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क की कोशिश
मामले को लेकर संबंधित खनिज विभाग के अधिकारियों से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि संपर्क करने पर अधिकारियों ने कॉल रिसीव नहीं किया। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
एसडीएम विशाल महाराणा ने कहा—जानकारी मिलते ही कार्रवाई
मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विशाल महाराणा से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की जानकारी मिलते ही संबंधित मामलों में कार्रवाई की जा रही है। एसडीएम ने बताया कि नागझर में कार्रवाई की गई है और कोसमबूढ़ा घाट से संबंधित जानकारी भी उनके द्वारा खनिज विभाग को दी जा चुकी है।
एसडीएम विशाल महाराणा के अनुसार जानकारी मिलते ही कार्रवाई की जा रही है। आपके द्वारा दी गई जानकारी को माइनिंग विभाग को सूचना की जा चुकी है। मौके पर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम के इस बयान के बाद अब निगाहें खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

अब मौके की जांच का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोसमबूढ़ा घाट में सुबह के समय अचानक जांच की जाए तो नदी में पहुंचने वाले वाहनों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। लोगों ने मांग की है कि वाहनों के ई-टीपी, रॉयल्टी, अभिवहन पास, रेत के स्रोत और उत्खनन की अनुमति की जांच की जाए। यदि कोई वाहन या घाट नियमों के विपरीत पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा का भी सवाल
सुबह के समय जब बच्चे स्कूल जाने के लिए निकलते हैं, उसी समय भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही के कारण सड़क पर धूल भी उड़ती है और कई जगहों पर यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में प्रशासन को केवल रेत उत्खनन की वैधता ही नहीं, बल्कि स्कूल समय में भारी वाहनों की आवाजाही से पैदा हो रहे सुरक्षा जोखिम को भी गंभीरता से लेना होगा।
अब देखना है कार्रवाई कितनी जमीन पर उतरती है
एक ओर स्थानीय लोगों की शिकायतें हैं और दूसरी ओर नदी में ट्रैक्टरों की मौजूदगी की तस्वीरें। वहीं एसडीएम ने संबंधित जानकारी खनिज विभाग को भेजे जाने और मौके पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब सवाल यह है कि खनिज विभाग की टीम कोसमबूढ़ा घाट कब पहुंचेगी और मौके पर जांच के बाद क्या कार्रवाई होगी?
यदि उत्खनन वैध है तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधितों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल कोसमबूढ़ा घाट की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं—क्योंकि खबर से आगे अब मौके पर कार्रवाई की जरूरत है।




