वन विभाग की जांच में सामने आया नया तथ्य, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि को लेकर शुरू हुई नई बहस
शिकायतकर्ता संत राम निर्मलकर ने मांगी निष्पक्ष जांच, संयुक्त सीमांकन और दस्तावेजों के सार्वजनिक खुलासे की मांग तेज
छुरा (गंगा प्रकाश)। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज एक शिकायत ने वन परिक्षेत्र पाण्डुका के तिलाईदादर क्षेत्र की भूमि को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। शिकायत के बाद वन विभाग की टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर की गई जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम तिलाईदादर तथा छुरा नगर पंचायत से लगे क्षेत्र की भूमि से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता संत राम निर्मलकर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि क्षेत्र में भूमि पर अतिक्रमण की गतिविधियां चल रही हैं और इसकी जांच आवश्यक है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वन परिक्षेत्र पाण्डुका की टीम ने स्थल निरीक्षण किया तथा उपलब्ध अभिलेखों की जांच की।

जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने संबंधित भूमि को राजस्व अभिलेख में दर्ज खसरा नंबर 40 की भूमि बताया। सूत्रों के अनुसार उक्त खसरा में कई लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनमें उमेश्वरी एवं रमेश अजगल्ले का नाम भी शामिल बताया गया है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि भूमि की वास्तविक प्रकृति क्या है और मौके की स्थिति राजस्व रिकॉर्ड से कितनी मेल खाती है।
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जांच के बाद और गहराया मामला
वन विभाग की प्रारंभिक जांच के बाद मामला शांत होने के बजाय और अधिक चर्चा में आ गया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है तो वहां मौजूद वास्तविक कब्जे, सीमांकन और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं यदि भूमि की प्रकृति को लेकर किसी प्रकार का विवाद है तो संयुक्त जांच के माध्यम से तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

शिकायतकर्ता संत राम निर्मलकर का कहना है कि यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक भूमि और रिकॉर्ड की पारदर्शिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने मांग की है कि राजस्व विभाग, वन विभाग और प्रशासन संयुक्त रूप से सीमांकन कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखें।
लोगों के बीच चर्चा का विषय बना खसरा नंबर 40
तिलाईदादर और आसपास के क्षेत्रों में खसरा नंबर 40 को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में दर्ज नामों और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। कई लोगों का मानना है कि संयुक्त सर्वे से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
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अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
- खसरा नंबर 40 की वास्तविक स्थिति क्या है?
- भूमि का स्वामित्व और दर्ज नामों का आधार क्या है?
- क्या मौके की स्थिति और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी समान है?
- क्या संयुक्त सीमांकन से नए तथ्य सामने आएंगे?
- क्या प्रशासन इस मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
जांच की मांग हुई तेज
जांच के बाद क्षेत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि भूमि विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों में स्पष्ट दस्तावेज, सीमांकन और प्रशासनिक पारदर्शिता ही भविष्य के विवादों को रोक सकती है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।





