गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। फिंगेश्वर की धरती ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। कृषि महाविद्यालय की मांग को लेकर नगरवासियों, किसानों, युवाओं और महिलाओं ने एकजुट होकर ऐसा महाबंद किया कि पूरा नगर थम-सा गया। फिंगेश्वर के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब लगातार दो दिन तक नगर शत-प्रतिशत बंद रहा। सिर्फ दुकानें ही नहीं, बल्कि खेत-खलिहान भी सूने दिखे। आम नागरिकों से लेकर ग्रामीण अंचल तक में इस आंदोलन की गूंज सुनाई दी।

जनता का जज्बा, प्रशासन की चुप्पी
नगर विकास एवं संघर्ष समिति के नेतृत्व में चले इस ऐतिहासिक आंदोलन में गुरुवार और शुक्रवार को पूरे फिंगेश्वर नगर के साथ बोरिद चौक और पुरेना मोड़ तक का व्यवसायिक परिसर पूरी तरह बंद रहा। कुछेक ठेले और होटल खुले भी तो आंदोलनकारियों ने समझाइश देकर उन्हें भी सहयोग के लिए तैयार कर लिया।
इस दौरान नागरिकों का आक्रोश प्रशासन के खिलाफ साफ झलकता रहा। लोगों का कहना है कि भूमि उपलब्ध करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन समिति ने खुद 100 एकड़ से अधिक भूमि चिन्हांकित कर राजस्व अधिकारियों के साथ मेहनत की। इसके बावजूद अब तक कृषि कॉलेज के निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
धरना, नारेबाजी और पुतला दहन
महाबंद के दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजे रानी श्यामकुमारी देवी चौक पर भारी भीड़ उमड़ी। किसानों, युवाओं और महिलाओं ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए और कृषि महाविद्यालय फिंगेश्वर में ही स्थापित करने की मांग को गगनभेदी नारों में दोहराया।
सभा को संबोधित करते हुए युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह सिर्फ शिक्षा का सवाल नहीं बल्कि फिंगेश्वर के भविष्य का प्रश्न है। वक्ताओं ने संकल्प लिया कि कॉलेज की घोषणा तक आंदोलन हर स्तर पर जारी रहेगा।
इसी बीच जोश में आए युवाओं ने कृषि महाविद्यालय के डीन ब्रजेन्द्र शर्मा और जिला प्रशासन का पुतला फूंका। इस दौरान पुलिसकर्मियों और आंदोलनकारी युवाओं के बीच हल्की झड़प भी हुई।

जुलूस और ज्ञापन
लगभग 3.15 बजे रानी श्यामकुमारी चौक से जुलूस निकाला गया जो नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचा। वहां एसडीएम विशाल महाराणा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कृषि महाविद्यालय की घोषणा तत्काल करने, भूमि आबंटन प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने और जनता की भावनाओं का सम्मान करने की मांग की गई।
“लड़ाई लंबी और निर्णायक” — संघर्ष समिति
नगर विकास एवं संघर्ष समिति के अध्यक्ष भागवत हरित और उपाध्यक्ष राजेन्द्र सूर्यवंशी ने कहा कि जब तक कृषि महाविद्यालय फिंगेश्वर में स्थापित करने की घोषणा नहीं होती, आंदोलन लगातार और गंभीर होता जाएगा। देर शाम समिति के सदस्य इस मुद्दे को लेकर राजिम विधायक रोहित साहू से भी मिले और स्थिति से अवगत कराया।
जनता का सवाल — वादे का क्या हुआ?
लोगों ने विधानसभा में सत्तापक्ष द्वारा की गई घोषणा की याद दिलाते हुए कहा कि यह सिर्फ जनता का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर का भी अपमान है। फिंगेश्वर में सभी परिस्थितियां अनुकूल होने के बावजूद कॉलेज निर्माण का रास्ता साफ न होना सभी के लिए रहस्य और चिंता का विषय है।




