निर्वाचित महिला सदस्यों के साथ पति नजर आए, सीईओ बोले—मेरे कार्यकाल में परिजनों को सदस्य की जगह बैठने की अनुमति नहीं; अब बैठक के रिकॉर्ड से खुलेगा राज
छुरा(गंगा प्रकाश)। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू है और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को पंचायत की निर्णय प्रक्रिया में स्वयं भूमिका निभाने का अधिकार एवं दायित्व है। लेकिन छुरा जनपद पंचायत की एक बैठक की सामने आई तस्वीरों ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में निर्वाचित महिला जनपद सदस्यों के साथ उनके पति बैठे दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर सामने आने के बाद चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि आखिर बैठक में गैर-निर्वाचित व्यक्ति किस हैसियत से मौजूद थे और क्या उन्हें बैठक में बैठने की अनुमति दी गई थी?
मामला केवल बैठक कक्ष में किसी व्यक्ति की मौजूदगी का नहीं, बल्कि पंचायत की औपचारिक कार्यवाही और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़ा हुआ है। यदि महिला जनपद सदस्य स्वयं बैठक में मौजूद थीं और उनके साथ पति भी बैठे थे, तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित व्यक्तियों की बैठक में उपस्थिति का आधार क्या था। क्या वे केवल दर्शक के रूप में मौजूद थे या बैठक की कार्यवाही के दौरान उनकी कोई भूमिका भी रही?

कुर्सी महिला सदस्य की, बगल में पति… आखिर नियम क्या कहते हैं?
पंचायत में निर्वाचित पद की जिम्मेदारी संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि की होती है। ऐसे में किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति की बैठक में मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि उन्हें अनुमति दी गई थी तो अनुमति किस अधिकारी ने दी और किस प्रावधान के तहत दी गई? वहीं यदि अनुमति नहीं थी तो बैठक कक्ष में उनकी मौजूदगी कैसे हुई, यह भी जांच का विषय है।
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भाजपा कार्यकर्ता होने की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई है कि तस्वीर में दिखाई दे रहे एक व्यक्ति ने स्वयं को भाजपा कार्यकर्ता बताया था। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे स्थानीय चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। संबंधित व्यक्ति की राजनीतिक पहचान और बैठक में उनकी भूमिका का वास्तविक खुलासा आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकता है।

रोजगार सहायक और उचित मूल्य दुकान संचालक होने की भी चर्चा
स्थानीय जानकारी में यह बात भी सामने आई है कि संबंधित महिला जनपद सदस्यों के पतियों में से एक के रोजगार सहायक और दूसरे के शासकीय उचित मूल्य दुकान के सेल्समैन होने की बात कही जा रही है। हालांकि इस जानकारी की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यदि यह तथ्य सही है तो यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि वे बैठक में किस हैसियत से मौजूद थे और क्या संबंधित विभाग अथवा जनपद पंचायत से उन्हें बैठक में उपस्थित रहने की अनुमति मिली थी।
सीईओ बोले—मेरे कार्यकाल में पति या परिजन सदस्य की जगह नहीं बैठते
इस मामले में जनपद पंचायत छुरा के सीईओ सतीश चंद्रवंशी ने स्पष्ट किया कि जिस दिन की तस्वीर सामने आई है, उस दिन वे अवकाश पर थे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में जनपद सदस्यों के पति अथवा परिजन बैठकों अथवा कार्यालयीन कार्यवाही में निर्वाचित सदस्य के स्थान पर उपस्थित नहीं रहते।
सीईओ के मुताबिक जनपद पंचायत में निर्धारित नियम एवं प्रक्रियाओं का पालन कराया जाता है तथा निर्वाचित जनपद सदस्य अपने पद से जुड़े दायित्वों का स्वयं निर्वहन करते हैं।
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सीईओ के इस बयान के बाद संबंधित बैठक को लेकर सवाल और गहरा गया है। जब अधिकारी स्वयं यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उनके कार्यकाल में ऐसी व्यवस्था नहीं है और संबंधित दिन वे अवकाश पर थे, तो उस दिन बैठक की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी और बैठक कक्ष में गैर-निर्वाचित व्यक्तियों की मौजूदगी कैसे हुई—इसका जवाब संबंधित रिकॉर्ड से ही मिल सकेगा।
उपस्थिति पंजी और सीसीटीवी खोलेगा पूरा राज !
पूरे मामले में संबंधित बैठक की उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, बैठक की अनुमति से संबंधित दस्तावेज और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। इन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि बैठक में कौन-कौन मौजूद था, किस हैसियत से मौजूद था और क्या किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति को बैठक में बैठने की अनुमति दी गई थी।
सवाल महिला आरक्षण की भावना का भी
महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल निर्वाचित पद पर महिला का नाम दर्ज करना नहीं, बल्कि पंचायत की निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि निर्वाचित महिला सदस्य के साथ उनके पति बैठक की औपचारिक व्यवस्था में बैठे नजर आते हैं तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी किसकी थी।
हालांकि केवल तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति को नियम उल्लंघन का दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति बैठक के आधिकारिक रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, सीसीटीवी और लागू पंचायत नियमों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल तस्वीर सवाल पूछ रही है और जनपद पंचायत का रिकॉर्ड जवाब का इंतजार कर रहा है। अब देखना यह है कि संबंधित बैठक के दस्तावेज सामने आने पर ‘पति राज’ की चर्चा में कितनी सच्चाई निकलकर सामने आती है।





