धान की रोपाई-बियासी शुरू: खेतों में रफ्तार, पर मजदूर और खाद की भारी किल्लत से हलकान किसान

 

गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। धान की रोपाई-बियासी शुरू: अंचल में बारिश की रफ्तार के साथ खेतों में धान की बियासी और रोपाई ने गति पकड़ ली है, लेकिन जैसे ही किसानी के काम ने जोर पकड़ा, वैसे ही किसानों की मुश्किलें भी सामने आ गईं। एक तरफ मजदूरों की भारी कमी ने काम की रफ्तार थाम दी है, तो दूसरी ओर खाद की किल्लत ने किसान की चिंता दोगुनी कर दी है। फिंगेश्वर, छुरा और मैनपुर क्षेत्र के किसान इस बार दोहरी मार झेल रहे हैं — मजदूर नहीं और खाद नहीं।

खेतों में हरियाली की उम्मीद, पर मजदूरों की नहीं मिल रही टोली

गांवों में बारिश के बाद बियासी और रोपाई का पारंपरिक सिलसिला शुरू हो चुका है। कई किसान अब भी बैल से नागर चलाकर खेत तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण आपसी सहयोग से एक-दूसरे के खेतों में हाथ बंटा रहे हैं, जिससे मजदूरों की कमी को कुछ हद तक थामा गया है। लेकिन एक साथ पूरे अंचल में काम शुरू हो जाने से मजदूरों की माँग एकदम से बढ़ गई है।

फिंगेश्वर के किसान बताते हैं, “हमारे गांव में हमेशा आपसी सहयोग से रोपाई करते हैं, लेकिन अब खेती इतनी बढ़ गई है कि मजदूरों के बिना काम पूरा कर पाना मुश्किल है। बाहर से मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च दुगना हो गया है।”

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खाद के लिए किसान लाइन में, फिर भी खाली हाथ लौट रहे

मजदूरों के साथ खाद की किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस समय खेतों में यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरकों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन सरकारी समितियों में केवल यूरिया ही उपलब्ध है।

किसान बताते हैं, “हर साल यही हाल होता है। रबी हो या खरीफ, खाद के लिए लाइन लगाओ, टोकन कटवाओ, और फिर भी हाथ खाली। मजबूर होकर बाजार से दोगुने दाम में खरीदना पड़ता है।”

कालाबाजारी और कागजी योजनाओं में उलझा किसान

सरकार की तरफ से खाद वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए टोकन सिस्टम और केंद्रों की संख्या बढ़ाने जैसे उपाय किए गए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत अलग है। किसानों का आरोप है कि खाद व्यापारी जमाखोरी और कालाबाजारी से बाज नहीं आ रहे।

छुरा के किसान का कहना है, “हम खाद लेने गए थे, वहां बताया गया कि स्टॉक खत्म हो गया। लेकिन शाम को वही खाद बाहर के व्यापारी ऊंचे दाम पर बेच रहे थे। ये सिस्टम की विफलता नहीं तो और क्या है?”

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‘अन्नदाता’ ही सबसे परेशान

विडंबना यह है कि देश के लिए अन्न उगाने वाला किसान ही सबसे ज्यादा संकट में है। न समय पर खाद मिलती है, न मजदूर। ऊपर से महंगाई और मौसम की मार अलग।

किसानों ने शासन-प्रशासन से तत्काल खाद की आपूर्ति बढ़ाने, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई और पर्याप्त मजदूरों की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेताया है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

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