बस्तर (गंगा प्रकाश)। मानसून की रफ्तार के साथ बस्तर विकासखंड के ग्राम मधोता 02 के खैरगुड़ा में धान रोपाई का काम पूरे जोश से चल रहा है। इस बार खेतों में सुबह से शाम तक महिलाओं की टोलियां नजर आ रही हैं। नंगे पांव कीचड़ में उतरकर ये महिलाएं धान की पौध रोप रही हैं और रोपाई के दौरान ददरिया व जगारगीत की गूंज से पूरा खेत सांस्कृतिक रंग में डूबा हुआ है।

खैरगुड़ा में धान रोपाई केवल खेती का काम नहीं रह गई है, बल्कि यह सामूहिक सहयोग और लोक परंपरा का जीवंत उदाहरण बन गई है। महिलाएं समूह बनाकर पहले नर्सरी से पौध उखाड़ती हैं, फिर उसकी गड्डियां तैयार कर कतारबद्ध तरीके से खेतों में रोपाई करती हैं। इस दौरान बुजुर्ग महिलाएं नई पीढ़ी को खेती की पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ लोकगीतों की विरासत भी सिखा रही हैं।

वन विभाग की उदासीनता से असुरक्षित हुए वन और वनभूमि, वृक्षारोपण क्षेत्रों तक पर अतिक्रमण का आरोप

गांव की महिलाएं घरेलू काम निपटाने के बाद टिफिन लेकर खेतों की ओर निकल जाती हैं। दोपहर में थोड़ा विश्राम कर फिर देर शाम तक रोपाई चलती है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को भी साथ लेकर आती हैं जो खेत की मेड़ पर खेलते रहते हैं। गांव में आज भी “पहले एक किसान के खेत में, फिर दूसरे के खेत में” वाली सामूहिक श्रम की परंपरा कायम है। इससे कम समय में सभी के खेतों की रोपाई पूरी हो जाती है। दोपहर के समय सभी महिलाएं एक साथ बैठकर भोजन करती हैं जिससे आपसी भाईचारा और मजबूत होता है।

खैरगुड़ा की किसान मंदना ठाकुर ने बताया कि समय पर धान रोपाई होना पूरे साल की आजीविका और खाद्यान्न सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है। उनके अनुसार पुरुष जुताई और सिंचाई संभालते हैं जबकि रोपाई की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है। खैरगुड़ा की महिलाएं रोपाई में दक्ष मानी जाती हैं। उन्हें पौध की उचित गहराई और दूरी का वर्षों का अनुभव है जिससे अच्छी उपज मिलती है। गांव की कई महिलाएं पिछले तीन दशकों से लगातार इस काम से जुड़ी हैं। अब युवा पीढ़ी की लड़कियां भी मां और दादी के साथ खेतों में उतर रही हैं। प्रिया बघेल , कुसुमलता,सत्यबती,सुंदरी बाई का कहना है कि लोकगीत गाते हुए काम करने से थकान महसूस नहीं होती और पूरा दिन आनंद से बीत जाता है।

सुरक्षा के लिए किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराना अनिवार्य, समाधान ऐप से होगी आसान प्रक्रिया

बस्तर की कृषि व्यवस्था आज भी महिलाओं और पुरुषों की संयुक्त मेहनत, अनुभव और परंपरागत ज्ञान पर आधारित है। खैरगुड़ा की महिलाएं अपनी मेहनत और समर्पण के जरिए यह संदेश दे रही हैं कि खेती सिर्फ रोजी-रोटी का साधन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता की मजबूत नींव भी है।

WhatsApp0 Facebook 0 Twitter 0 0Shares
Share.

About Us

Chif Editor – Prakash Kumar yadav

Founder – Gangaprakash

Contact us

📍 Address:
Ward No. 12, Jhulelal Para, Chhura, District Gariyaband (C.G.) – 493996

📞 Mobile: +91-95891 54969
📧 Email: gangaprakashnews@gmail.com
🌐 Website: www.gangaprakash.com

🆔 RNI No.: CHHHIN/2022/83766
🆔 UDYAM No.: CG-25-0001205

Disclaimer

गंगा प्रकाश छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले छुरा(न.प.) से दैनिक समाचार पत्रिका/वेब पोर्टल है। गंगा प्रकाश का उद्देश्य सच्ची खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का है। जिसके लिए अनुभवी संवाददाताओं की टीम हमारे साथ जुड़कर कार्य कर रही है। समाचार पत्र/वेब पोर्टल में प्रकाशित समाचार, लेख, विज्ञापन संवाददाताओं द्वारा लिखी कलम व संकलन कर्ता के है। इसके लिए प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी, संपादक की कोई जवाबदारी नहीं है। न्यायिक क्षेत्र गरियाबंद जिला है।

Ganga Prakash Copyright © 2025. Designed by Nimble Technology

You cannot copy content of this page

WhatsApp us

Exit mobile version