छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिले के धान संग्रहण केंद्र इन दिनों एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। किसानों की सुविधा और सरकारी कार्यों के लिए बनाए गए इन केंद्रों पर राजनीतिक गतिविधियों के आरोप लगने से मामला गरमा गया है। विशेषकर छुरा क्षेत्र के सिवनी धान खरीदी केंद्र में कथित रूप से एक राजनीतिक दल का झंडा फहराए जाने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
सरकारी केंद्र पर राजनीतिक गतिविधि का आरोप
जानकारी के अनुसार सिवनी स्थित धान खरीदी केंद्र पूरी तरह शासकीय नियंत्रण में संचालित होता है, जहां केवल किसानों से धान खरीदी और संबंधित कार्य किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद केंद्र परिसर में राजनीतिक दल का झंडा फहराए जाने की घटना सामने आई है, जिसे नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय किसानों और नागरिकों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जहां वे अपनी उपज बेचने आते हैं, वहां राजनीतिक माहौल बनाना अनुचित है। किसानों का साफ कहना है— धान बेचने के केंद्र पर राजनीति क्यों? उनका मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से सरकारी व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित होती है और आम किसानों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
प्रभारी का बड़ा खुलासा
मंडी प्रभारी चरण सिंह ने पूरे मामले में अहम जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने झंडा फहराने से मना किया था, लेकिन अध्यक्ष तिहार सिंह ठाकुर द्वारा जबरदस्ती झंडा फहराया गया। इतना ही नहीं, प्रभारी के अनुसार कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था भी करने को कहा गया।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रशासन की जानकारी या मौजूदगी में यह कार्यक्रम कैसे हुआ? क्या इसके लिए कोई अनुमति दी गई थी या फिर बिना अनुमति के ही आयोजन कर लिया गया? प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बिना अनुमति किसी भी शासकीय परिसर में राजनीतिक झंडा लगाना प्रतिबंधित है और ऐसा पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारी संपर्क से बाहर
इस मामले में धान खरीदी के जिला नोडल अधिकारी शिवेश मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे प्रशासनिक पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका।
कार्रवाई की मांग तेज
विपक्षी नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो भविष्य में शासकीय संस्थानों का राजनीतिक दुरुपयोग बढ़ सकता है।
निष्पक्षता पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल
धान खरीदी केंद्र जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक उपयोग के स्थल पर राजनीतिक गतिविधि न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—सख्त कार्रवाई या फिर मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।
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