छुरा (गंगा प्रकाश)। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति खड़मा के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान मड़ेली में राशन सामग्री की कमी का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। सामने आए पंचायतनामा में ग्रामीणों और समिति प्रतिनिधियों ने भौतिक सत्यापन के दौरान चावल, नमक और शक्कर की कमी पाए जाने का उल्लेख किया है। वहीं, बाद में विभागीय जांच और बैंक दस्तावेजों में लाखों रुपये की कमी दर्ज होने तथा संबंधित विक्रेता के बैंक खाते पर होल्ड लगाए जाने की कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 28 अक्टूबर 2024 को तैयार पंचायतनामा में उल्लेख किया गया है कि उपभोक्ता केंद्र मड़ेली की दुकान आईडी 442012049 के स्टॉक का सत्यापन किया गया। सत्यापन में चावल की 208.06 क्विंटल, नमक की 5.82 क्विंटल तथा शक्कर की 3.03 क्विंटल कमी पाए जाने की बात दर्ज है। पंचायतनामा में यह भी उल्लेख है कि उक्त कमी भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आई।
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दस्तावेज पर पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों तथा समिति से जुड़े व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। पंचायतनामा में कमी की पुष्टि होने के बाद संबंधित मामले को विभागीय जांच के लिए अग्रेषित किया गया था।
पहले भी जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
इससे पूर्व खाद्य निरीक्षक द्वारा मई 2024 में दुकान का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में स्टॉक रजिस्टर संधारण में अनियमितता, दुकान के नियमित संचालन में लापरवाही तथा राशन सामग्री की कमी का उल्लेख किया गया था। इसके आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) छुरा ने समिति के पदाधिकारियों और संबंधित विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

27 लाख रुपये से अधिक की कमी का दावा
बाद में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा खड़मा द्वारा नोडल अधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया कि राशन दुकान संचालन के दौरान चावल एवं अन्य स्कंध में कुल 27,19,857.51 रुपये की कमी पाई गई। राशि की वसूली नहीं होने पर संबंधित विक्रेता के बचत खाते पर होल्ड लगा दिया गया ताकि खाते से किसी प्रकार का लेन-देन न हो सके।
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वेतन विवाद भी आया सामने
मामले के बीच संबंधित विक्रेता द्वारा 16 माह का वेतन नहीं मिलने की शिकायत भी प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत की गई है। इस शिकायत पर एसडीएम कार्यालय ने समिति प्रबंधन से जांच प्रतिवेदन मांगा है। हालांकि दूसरी ओर विभागीय दस्तावेजों में राशन सामग्री की कमी और वसूली की कार्रवाई का उल्लेख भी दर्ज है।
कई सवाल अब भी अनुत्तरित
पंचायतनामा, विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस और बैंक खाते पर होल्ड जैसी कार्रवाइयों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कमी की अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई है और शासन को हुए नुकसान की पूरी भरपाई कब तक होगी। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लोगों का विश्वास बना रहे।




