पोर्टल में शिकायत निपटी, लेकिन 11 केवी बिजली लाइन आज भी वहीं; सुशासन तिहार, जनदर्शन और हेल्पलाइन के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
छुरा(गंगा प्रकाश)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और सुशासन तिहार के जरिए आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के दावों पर छुरा नगर पंचायत क्षेत्र से गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर शिकायतों का निराकरण दिखा दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर वर्षों पुरानी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
मामला छुरा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 14 एवं 15 का है, जहां आबादी के बीच से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन को स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।शिकायतकर्ता के अनुसार इस संबंध में 9 जून 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

पोर्टल पर उल्लेख किया गया कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी को तीन दिनों के भीतर डिमांड नोट जारी किया जाएगा, लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि आज तक न तो डिमांड नोट जारी हुआ और न ही कार्य शुरू हो सका।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। वर्ष 2012 में तत्कालीन मंत्री पून्नूराम मोहिले ने नगर सुराज अभियान के दौरान बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए राशि की घोषणा की थी, लेकिन करीब डेढ़ दशक बाद भी कार्य अधूरा है। इसके बाद वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मडेली में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान स्वयं आवेदन लिया था, किंतु शिकायतकर्ता के अनुसार उसका भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2026 के सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में लगातार आवेदन देने के बावजूद फाइलें केवल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक घूमती रहीं, जबकि पोर्टल पर शिकायत का निराकरण दर्ज कर दिया गया। उनका कहना है कि इससे शिकायत निवारण प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद अधिकांश जटिल जनसमस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार राशन कार्ड, पेंशन, आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्र जैसी सेवाओं से आगे बढ़कर आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं देती।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का वास्तविक सत्यापन हो तो कई मामलों में पोर्टल और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आ सकता है। उनका मानना है कि शिकायतों के वास्तविक समाधान की स्वतंत्र समीक्षा आवश्यक है, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे।
जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि यदि शिकायतें वर्षों तक केवल फाइलों और पोर्टल तक सीमित रह जाएं, तो फिर सुशासन तिहार, जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक कब पहुंचेगा?





