सरकार स्कूलों में मना रही शाला प्रवेशोत्सव, लेकिन बीजापुर के इस स्कूल में बच्चे पढ़ेंगे या खतरे से लड़ेंगे? जलभराव और जर्जर भवन ने बढ़ाई अभिभावकों की चिंता, DEO बोले—10 दिन का समय दीजिए, पूरे मामले को संज्ञान में लूंगा
यदिन्द्रन नायर
बीजापुर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ सरकार इन दिनों पूरे प्रदेश में शाला प्रवेशोत्सव के माध्यम से शिक्षा को जन-आंदोलन का रूप देने में जुटी है। स्कूलों में नए विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री, मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और उज्ज्वल भविष्य का संदेश दे रहे हैं। लेकिन इन सरकारी दावों और उत्सवों के बीच बीजापुर जिले के पुजारीपारा, तुमनार रोड स्थित आदेश्वर पब्लिक स्कूल की तस्वीरें एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने ला रही हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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लगातार हो रही बारिश के कारण विद्यालय का पूरा परिसर पानी से लबालब भर गया है। स्कूल का मैदान, मुख्य प्रवेश मार्ग, बरामदे और कक्षाओं के सामने तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह विद्यालय का परिसर है या फिर किसी तालाब का किनारा। शाला प्रवेशोत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
स्कूल नहीं, मानो तालाब बन गया परिसर
तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि विद्यालय का पूरा मैदान पानी में डूबा हुआ है। बच्चों के खेलने का स्थान अब जलाशय जैसा नजर आ रहा है। मुख्य गेट से लेकर कक्षाओं तक जाने वाले रास्तों पर पानी जमा है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों के लिए विद्यालय पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
यदि लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा तो जलभराव और बढ़ सकता है। इससे न केवल पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

सबसे बड़ा खतरा—जर्जर भवन
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू केवल जलभराव नहीं, बल्कि विद्यालय भवन की हालत भी है। स्थानीय लोगों के अनुसार आदेश्वर पब्लिक स्कूल का भवन काफी समय से जर्जर अवस्था में है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें दिखाई देती हैं, जबकि भवन के कुछ हिस्सों की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि लगातार बारिश के बीच कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
बरसात के मौसम में जर्जर भवनों की मजबूती और कमजोर हो जाती है। ऐसे में यदि सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन इसी भवन में बैठकर पढ़ाई करें, तो उनकी सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न बन जाती है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को शिक्षा देना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उनकी जान की सुरक्षा है।
शाला प्रवेशोत्सव की चमक, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
प्रदेशभर में शाला प्रवेशोत्सव के दौरान मंच सज रहे हैं, स्वागत समारोह हो रहे हैं, बच्चों को तिलक लगाकर प्रवेश दिलाया जा रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन बीजापुर के इस विद्यालय की तस्वीरें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या केवल कार्यक्रम आयोजित कर देना ही पर्याप्त है?
यदि किसी विद्यालय में बच्चे पानी से घिरे परिसर और जर्जर भवन के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हों, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। शिक्षा केवल पुस्तकों और प्रवेशोत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित भवन, स्वच्छ परिसर और मूलभूत सुविधाएं भी उसका अभिन्न हिस्सा हैं।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
विद्यालय की मौजूदा स्थिति को देखकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों को ऐसे परिसर में भेजना जोखिम भरा है। जलभराव के कारण फिसलन, गड्ढों में गिरने, सांप-बिच्छू निकलने और जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है। वहीं यदि भवन की स्थिति वास्तव में जर्जर है तो बारिश के दौरान कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।

हर वर्ष दोहराई जाती है समस्या?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या नई नहीं है। क्षेत्र में समुचित जल निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष ऐसी स्थिति बनती है। यदि समय रहते नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और परिसर का समतलीकरण कराया जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती, जिसके कारण हर मानसून में बच्चों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हमारे संवाददाता ने जिला शिक्षा अधिकारी से लिया पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए हमारे स्थानीय संवाददाता ने विद्यालय की जलमग्न स्थिति तथा जर्जर भवन की तस्वीरों के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बीजापुर से चर्चा की।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा— मैं अभी-अभी यहां पदस्थ हुआ हूं। मुझे लगभग 10 दिवस का समय दीजिए। सभी विद्यालयों की जानकारी एकत्र कर पूरे मामले को संज्ञान में लूंगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी का यह बयान बताता है कि वे मामले की जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए।
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विशेषज्ञ भी मानते हैं—सुरक्षा सर्वोपरि
शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी विद्यालय में सबसे पहली आवश्यकता सुरक्षित भवन और सुरक्षित परिसर की होती है। यदि विद्यालय भवन असुरक्षित हो या परिसर में जलभराव हो, तो पढ़ाई का वातावरण स्वतः प्रभावित हो जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा तत्काल निरीक्षण और आवश्यक कदम उठाना जरूरी होता है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
क्षेत्रवासियों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- विद्यालय परिसर से तत्काल पानी की निकासी कराई जाए।
- भवन का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
- यदि भवन असुरक्षित मिले तो बच्चों की कक्षाएं वैकल्पिक सुरक्षित भवन में संचालित की जाएं।
- स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए।
- मानसून के दौरान विद्यालयों की सुरक्षा का विशेष निरीक्षण किया जाए।
अब प्रशासन की परीक्षा
शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, लेकिन यदि विद्यालय ही खतरे के साए में हो तो यह उद्देश्य अधूरा रह जाता है। आदेश्वर पब्लिक स्कूल की तस्वीरें केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि उन बुनियादी व्यवस्थाओं की ओर इशारा करती हैं जिन पर समय रहते ध्यान देना आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बच्चे जलमग्न और जर्जर विद्यालय में पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे, या फिर प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?
फिलहाल निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्योंकि शिक्षा का पहला पाठ सुरक्षित वातावरण से ही शुरू होता है, और यदि वही सुरक्षित नहीं होगा तो शाला प्रवेशोत्सव का उत्साह भी अधूरा रह जाएगा।





