वर्षों से जिला मुख्यालय और शिक्षा कार्यालयों में जमे शिक्षकों-कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त करने की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिले के शिक्षा विभाग में वर्षों से चले आ रहे संलग्नीकरण (अटैचमेंट) के मुद्दे ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिला शिक्षा कार्यालय, समग्र शिक्षा कार्यालय तथा जिले के सभी विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में वर्षों से संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र क्रमांक एमआईएस/N-123/445, दिनांक 25 जून 2026 के तहत स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देशानुसार सभी संलग्न कर्मचारियों एवं शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना संस्थानों में कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद गरियाबंद जिले में अब तक इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शासन के निर्देशों की अनदेखी हो रही है।
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कांग्रेस का आरोप है कि जिला शिक्षा कार्यालय, समग्र शिक्षा कार्यालय और विभिन्न विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी वर्षों से संलग्न हैं, जबकि उनकी मूल पदस्थापना ग्रामीण एवं शहरी स्कूलों में है। इसके कारण अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि सरकार ने संलग्नीकरण समाप्त करने का स्पष्ट निर्णय लिया है, इसलिए गरियाबंद जिले में भी बिना किसी भेदभाव के आदेश का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों के कारण संलग्नीकरण की व्यवस्था वर्षों से बनी हुई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शासन के आदेश का शीघ्र पालन नहीं किया गया और सभी संलग्न कर्मचारियों एवं शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यमुक्त नहीं किया गया, तो जिला मुख्यालय गरियाबंद में व्यापक चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के निर्देश के बाद प्रदेश के कई जिलों में संलग्नीकरण समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में गरियाबंद जिले में कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शासन के आदेश के अनुरूप कितने संलग्न शिक्षक एवं कर्मचारी अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटते हैं और प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है।





