बरसों का इंतजार खत्म: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
देश की सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार की दलीलों को दरकिनार करते हुए होमगार्ड्स के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि होमगार्ड जवान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस के कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं, ऐसे में उनके वेतन में भारी अंतर संवैधानिक रूप से गलत है। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जवानों को ड्यूटी भत्ता (Duty Allowance) पुलिस कांस्टेबल के न्यूनतम पे-स्केल के आधार पर तय किया जाए। इसमें बेसिक पे, ग्रेड पे और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होगा।
“यह सिर्फ वेतन की वृद्धि नहीं, बल्कि हमारे सम्मान की जीत है। हम पिछले 15-20 वर्षों से इसी हक की लड़ाई लड़ रहे थे। अब हमें भी अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित नजर आ रहा है।”
— संतोष साहू, जिला अध्यक्ष, होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन
इस फैसले का सीधा असर छत्तीसगढ़ के लगभग 10,000 से अधिक होमगार्ड जवानों पर पड़ेगा। अब प्रशासन को बजट में अतिरिक्त प्रावधान करने होंगे। जवानों को न केवल बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा, बल्कि पिछले कुछ वर्षों का एरियर (Arrear) मिलने की भी संभावना बढ़ गई है। विभाग के सूत्रों के अनुसार, महानदी भवन (मंत्रालय) में जल्द ही इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर बड़ी बैठक बुलाई जा सकती है। आम नागरिकों के लिए इसका अर्थ है—एक अधिक संतुष्ट और प्रेरित सुरक्षा बल, जो यातायात प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा में तैनात रहता है।
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