रात में घर में सोते समय सांप ने डंसा, मैनपुर से गरियाबंद रेफर के दौरान तोड़ा दम
गरियाबंद/मैनपुर (गंगा प्रकाश)।गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धोबीपारा (कोयलीबेड़ा) में करैत सांप के डंसने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैनपुर के प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम धोबीपारा निवासी भानुशंकर पाड़े की पुत्री गोमाक्षी पाड़े को मंगलवार रात लगभग 10 बजे घर में सोते समय जहरीले करैत सांप ने डंस लिया। सांप के काटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैनपुर लेकर पहुंचे।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बच्ची को समय पर समुचित उपचार नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था के अभाव के कारण बच्ची की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल गरियाबंद रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
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घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि मैनपुर जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं, इसके बावजूद अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आपातकालीन उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनका आरोप है कि समय पर बेहतर उपचार मिलता तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष नहीं आया सामने
मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। हालांकि घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मासूम गोमाक्षी पाड़े की असमय मौत ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।




