हरदी में हवन-पूजन के बाद निकली भव्य विसर्जन यात्रा, ढोल-नगाड़ों के बीच तालाब में दी गई गणपति बप्पा को विदाई
छुरा (गंगा प्रकाश)। दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर गणेश समिति द्वारा आयोजित 11 दिवसीय गणेश उत्सव का शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के बीच समापन हुआ। ग्यारह दिनों तक भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हरदी भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। उत्सव के अंतिम दिन जब गणपति बप्पा की विसर्जन यात्रा निकली तो पूरा गांव “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष से गूंज उठा।
सुबह से ही दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। अंतिम दिन विधि-विधान से हवन-पूजन कराया गया। इसके बाद भगवान श्री गणेश की विशेष आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

जयकारों के बीच निकली विसर्जन यात्रा
हवन-पूजन और आरती के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जन के लिए तालाब की ओर ले जाया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्तों के जयघोष के बीच निकली विसर्जन यात्रा आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालु उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए और रास्तेभर गणपति बप्पा के जयकारे लगाते रहे।
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तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विदाई के समय श्रद्धालुओं के बीच भावुकता भी दिखाई दी। भक्तों ने अगले वर्ष भगवान गणेश के पुनः आगमन की कामना करते हुए अगले बरस तू जल्दी आ का जयघोष किया।

11 दिनों तक व्यवस्था में जुटी रही समिति
गणेश उत्सव के सफल आयोजन में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर गणेश समिति के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समिति के कन्हैया, लोकेश्वर, टायल, संतोष, मेष, रूपसिंग, हुमसिंग, नोहर, अमरसिंग, शेखर, अक्कू, सत्यम, पोखराज, गणपत, तुलस, यशवंत, रामु, पन्ना एवं रुपनाथ बंजारे सहित अन्य सदस्यों ने 11 दिनों तक पूजा-अर्चना और आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।
भक्ति के साथ संस्कृति का भी रहा रंग
हरदी में आयोजित गणेश उत्सव धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा। विभिन्न कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे 11 दिनों तक गांव में श्रद्धा, उमंग और आपसी भाईचारे का माहौल बना रहा।
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गणेश प्रतिमा के विसर्जन के साथ ही उत्सव का समापन हुआ। अंतिम विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से गांव और क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की प्रार्थना की। बप्पा की विदाई के बाद अब ग्रामीणों को अगले वर्ष गणपति के पुनः आगमन का इंतजार रहेगा।





