गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के आबकारी विभाग से जुड़ी दो अलग-अलग शिकायतों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े अधिकारी पर दो ग्रामीणों ने अलग-अलग समय में शराब का प्रकरण बनाने और जेल भेजने की कथित धमकी देकर कुल 1.50 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। दोनों शिकायतें 9 सितंबर 2026 को कलेक्टर गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर कार्रवाई और कथित रूप से ली गई रकम वापस दिलाने की मांग की है।
केवटीझर के 70 वर्षीय ग्रामीण ने लगाए 90 हजार लेने के आरोप
पहली शिकायत ग्राम केवटीझर, थाना छुरा निवासी करीब 70 वर्षीय धनु राम मांझी, पिता रामसिंह मांझी ने की है। आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में आबकारी वृत्त गरियाबंद के संबंधित साहब द्वारा शराब का प्रकरण बनाने और जेल भेजने की धमकी देकर उनसे कथित रूप से 90 हजार रुपये लिए गए।
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शिकायत में धन्नूराम ने बताया कि कथित रूप से रकम लेने के बाद उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद आवेदन के अनुसार 9 सितंबर 2026 को आबकारी अधिनियम की धारा 36 के तहत न्यायालय में इस्तगासा पेश किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जेल भेजे जाने की कथित धमकी के कारण वह और उनका परिवार मानसिक एवं आर्थिक परेशानी में आ गया। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि परिवार के लोगों से पैसा मांगने के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषण बेचकर रकम की व्यवस्था करनी पड़ी।

देवगांव के धर्मराज ने लगाए 60 हजार रुपये लेने के आरोप
दूसरी शिकायत ग्राम देवगांव, थाना छुरा निवासी करीब 55 वर्षीय धरमराज, पिता पुनीत, जाति कलार ने की है। उनके आवेदन में आरोप है कि मई 2026 में शराब का प्रकरण बनाने और जेल भेजने की कथित धमकी देकर उनसे 60 हजार रुपये लिए गए।
धरमराज के मुताबिक, रकम लेने के बाद कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। लेकिन 9 सितंबर 2026 को धारा 36 आबकारी अधिनियम के तहत न्यायालय में इस्तगासा पेश किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत में धरमराज ने खुद को गरीब बताते हुए कहा है कि वह और उनका परिवार मजदूरी कर जीवन-यापन करता है। आवेदन के मुताबिक कथित रकम जुटाने के लिए उसे अपनी जमीन रेहन रखने तक की स्थिति से गुजरना पड़ा, जिससे परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े दोनों आरोप
दोनों शिकायतों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आबकारी वृत्त गरियाबंद के संबंधित अधिकारी के रूप में जिस मोबाइल नंबर 7999574565 का उल्लेख किया गया है, वह दोनों आवेदनों में समान है। एक शिकायत में 90 हजार और दूसरी में 60 हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है। यानी दोनों शिकायतों में कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की कथित रकम का उल्लेख सामने आया है।

इस्तगासा पेश होने के बाद क्यों उठे सवाल?
दोनों शिकायतकर्ताओं के आवेदन में मई और जुलाई 2026 में कथित रूप से रकम दिए जाने तथा इसके बाद 9 सितंबर 2026 को आबकारी अधिनियम की धारा 36 के तहत न्यायालय में इस्तगासा पेश किए जाने का उल्लेख है। इसी घटनाक्रम को लेकर शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
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अब बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं तो कथित रकम लेने के बावजूद न्यायालय में प्रकरण कैसे पहुंचा? क्या दोनों मामलों में किसी प्रकार का लेन-देन हुआ था? क्या शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड, केस डायरी और अन्य साक्ष्यों की जांच होगी?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आबकारी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतकर्ताओं के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी अथवा आबकारी विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
दोनों ग्रामीणों ने कलेक्टर गरियाबंद से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने तथा कथित रूप से ली गई राशि वापस दिलाने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।





