देवरी, विजयपुर और बिरोडार के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, पूर्व सरपंच के कार्यकाल की जांच की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। गांवों के विकास और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वीकृत शासकीय निर्माण कार्य यदि कुछ ही वर्षों में बदहाली का शिकार हो जाएं, तो जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है। छुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरी एवं उसके आश्रित गांवों में निर्माण कार्यों की दुर्दशा को लेकर अब जवाबदेही और जांच की मांग उठने लगी है। वहीं, जनपद पंचायत के एक अधिकारी के अनुसार मामले में वसूली का प्रकरण दर्ज किया गया है, जिससे इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
👉 जरूर पढ़ें : सात दिन में क्या होगा फैसला? चौरहा सरपंच पर कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम विजयपुर में शौचालय निर्माण, देवरी में सामुदायिक भवन एवं सांस्कृतिक भवन तथा बिरोडार में रंगमंच से संबंधित निर्माण कार्य पिछले करीब चार वर्षों से बदहाल स्थिति में बताए जा रहे हैं। जिन निर्माण कार्यों से ग्रामीणों को सुविधा मिलनी थी, वे समुचित उपयोग के अभाव और रखरखाव की कमी के चलते जर्जर होते जा रहे हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता, कार्यों की पूर्णता और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जाता है कि इन निर्माण कार्यों के दौरान अशोक ठाकुर ग्राम पंचायत देवरी के सरपंच थे। वर्तमान में वे पूर्व सरपंच हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल में कराए गए निर्माण कार्यों की स्थिति और संबंधित अभिलेखों की जांच किए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी और अनियमितता का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चार वर्षों से बदहाल बताए जा रहे इन निर्माण कार्यों की सुध किसने ली? निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च की गई, कार्यों का मूल्यांकन किस आधार पर हुआ और वसूली प्रकरण किन तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है? क्या संबंधित निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण कराया गया है? इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

ग्रामीण विकास से जुड़े इन कार्यों को लेकर अब जनपद पंचायत प्रशासन से स्थल निरीक्षण, तकनीकी जांच, निर्माण संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा तथा वसूली प्रकरण की स्थिति सार्वजनिक करने की अपेक्षा की जा रही है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण या जिम्मेदारों की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
👉 जरूर पढ़ें : बीजापुर में जमीन के खेल पर गंभीर सवाल ! आदिवासी भूमि पर कथित निर्माण, रात के अंधेरे में काम और भूमाफियाओं के रसूख की चर्चा से गरमाया मामला
सरकारी धन से निर्मित सार्वजनिक परिसंपत्तियां ग्रामीणों की सुविधा का माध्यम होती हैं, न कि बदहाली की तस्वीर। ऐसे में देवरी, विजयपुर और बिरोडार के निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और जिम्मेदारी तय करना अब जनपद प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन गया है।





