आंधी-तूफान और बारिश के बीच अधूरे स्कूल भवन को लेकर एसडीएम और बीईओ कार्यालय का घेराव, निर्माण पूरा होने तक शाला बहिष्कार की चेतावनी
मैनपुर (गंगा प्रकाश)। शिक्षा की उम्मीद लेकर जब नन्हे बच्चों को ही अपनी पढ़ाई के अधिकार के लिए संघर्ष की राह पर उतरना पड़े, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बोईरगांव के आश्रित ग्राम ठेमली में अधूरे स्कूल भवन की समस्या को लेकर ऐसा ही नजारा सामने आया, जहां छोटे-छोटे स्कूली बच्चे और ग्रामीण आंधी-तूफान व बारिश के बीच करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर मैनपुर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय का घेराव किया।
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ग्रामीणों के अनुसार, ठेमली प्राथमिक शाला का भवन लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इसके चलते पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में करने की मजबूरी बनी हुई है। एक कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन पूरा कराने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष मांग रखी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

आखिरकार मंगलवार को बच्चों और पालकों ने आंदोलन का रास्ता चुना। खराब मौसम, तेज हवा और बारिश के बावजूद छाता लेकर बच्चे अपने पालकों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए मैनपुर पहुंचे। करीब 15 किलोमीटर की इस पदयात्रा के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम कार्यालय और बीईओ कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का आरोप है कि पदयात्रा की सूचना तीन दिन पहले दिए जाने के बावजूद रास्ते में कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा।

भवन निर्माण पूरा होने तक शाला बहिष्कार
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक स्कूल भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, तब तक वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे और शाला बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए जल्द ठोस पहल करने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों को उचित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना शासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है।
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अब सवाल यह है कि जिस शिक्षा के लिए बच्चों को स्कूल जाना चाहिए, उसी शिक्षा की बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें 15 किलोमीटर पैदल संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? फिलहाल ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और अधूरे भवन के निर्माण की समय-सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।





