डोंगरगढ़ – डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर रोपवे एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार भी किसी धार्मिक आयोजन या श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण नहीं, बल्कि एक बार फिर हुई तकनीकी लापरवाही के चलते। शुक्रवार को मंदिर रोपवे की एक ट्रॉली पटरी से उतर कर एक ओर झुक गई, जिससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। गनीमत यह रही कि उस समय ट्रॉली में कोई सवार नहीं था, अन्यथा यह घटना गंभीर जनहानि में बदल सकती थी।
वही पुराना स्थान, फिर वही लापरवाही
इस घटना ने सबको उस पूर्व हादसे की याद दिला दी, जब करीब डेढ़ महीने पहले इसी स्थान पर वीआईपी नेताओं से भरी ट्रॉली दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस हादसे में भाजपा के प्रदेश महामंत्री भरत वर्मा, पूर्व मंत्री रामसेवक पैकरा और मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल घायल हुए थे। तब प्रशासन और ट्रस्ट ने सुरक्षा सुधार के वादे किए थे। रोपवे को कुछ दिन बंद रखा गया, खानापूर्ति की गई और संचालन को ‘सुरक्षित’ घोषित कर पुनः चालू कर दिया गया। लेकिन अब एक बार फिर वही चूक उजागर हो गई है।
ट्रस्ट ने पहले इंकार किया, वीडियो वायरल होने पर मानी घटना
हैरानी की बात यह है कि मंदिर ट्रस्ट ने इस घटना से पहले इनकार कर दिया था, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन और ट्रस्ट की बोलती बंद हो गई। इसके बाद शुरू हुआ जिम्मेदारी से बचने का सिलसिला — कंपनी पर आरोप मढ़ना, तकनीकी खामियों का हवाला देना, बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करना और ट्रस्ट द्वारा खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास।
प्रशासन ने मानी घटना, फिलहाल रोपवे बंद
डोंगरगढ़ के एसडीएम मनोज मरकाम ने मीडिया से पुष्टि करते हुए बताया कि रोपवे के एक डिब्बे के डिरेल होने की घटना घटी है, हालांकि इसमें किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। घटना उस समय की है जब ट्रॉली नीचे उतर रही थी और उसमें कोई सवारी नहीं थी। इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया है।
एनआईटी की सिफारिशों पर भी सवाल
पूर्व की एक दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान (NIT) से जांच कराई गई थी। रिपोर्ट में यह कहा गया था कि रोपवे को मैन्युअल मोड में भी संचालित किया जा सकता है, ताकि अचानक आई तकनीकी गड़बड़ियों पर नियंत्रण पाया जा सके। ट्रस्ट और संचालन कंपनी ने इसी आधार पर रोपवे को मैन्युअल मोड में ऑपरेट करने का निर्णय लिया था। बावजूद इसके, आज फिर रोपवे के ट्रॉली के डिरेल होने से स्पष्ट है कि सुधार केवल कागजों तक सीमित था। डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां सालभर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। पर्व और नवरात्रि जैसे अवसरों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है और श्रद्धालु मुख्य रूप से रोपवे के माध्यम से मंदिर तक पहुंचते हैं। ऐसे में लगातार हो रही तकनीकी खामियां, जांच में लापरवाही और संचालन में अनियमितताएं श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं।
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